चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा शनिवार को सतत विकास लक्ष्य की आठवीं वर्षगांठ पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का प्रारंभ करते हुए प्राचार्य प्रो. कुलदीप नेगी ने कहा कि पूरी ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करके ही विकास के सतत लक्ष्यों की पूर्ति की जा सकती है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ एसके लाल ने सतत् विकास के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सतत् विकास की संभावनाएं सर्वव्यापी हैं।
मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय आर्थिक परिषद के सचिव एवं चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ अर्थशास्त्री प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि विकसित राष्ट्र विकासशील राष्ट्र के विकास में सदैव चुनौती पूर्ण होता है। इसलिए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान समय में रोजगार के क्षेत्र में चुनौती बहुत है। सरकारी क्षेत्र में रोजगार अवसर मात्र 9 प्रतिशत है, जबकि निजी क्षेत्र में 91 प्रतिशत है। सामाजिक आर्थिक विकास तभी सतत् विकास में परिवर्तित हो सकता है, जब पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ विकास के मार्ग को अपनाया जाए। जब तक हम जागरूक नहीं होंगे, तब तक सतत् विकास संभव नहीं है।
डॉ अभय कुमार ने विकास लक्ष्य के 17 बिंदुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। साथ ही छात्र राहुल सिंह, नवीन प्रकाश, आरती, देवेंद्र सिंह, रश्मि बिष्ट आदि ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किये।
कार्यक्रम में विभाग के प्राध्यापक डॉ राकेश कुमार मिश्र ने कहा कि वर्तमान में हम सतत् विकास के लक्ष्य को तभी प्राप्त कर सकते हैं, जब छोटे-छोटे स्तर पर की गई गलतियों को सुधार करें। इस मौके पर बी एड के विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ रमाकांत यादव, डॉ तुषार कंडारी, अवधेश बिष्ट, दीपक सिंह आदि उपस्थित रहे।
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