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सीबीआई से करायें स्टील फैक्ट्रियों में बिजली चोरी की जांच : रीजनल पार्टी

By: prabhatchingari

On: Thursday, March 27, 2025 10:58 PM

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देहरादून,राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से रुड़की और काशीपुर सर्कल के अंतर्गत स्थापित स्टील फैक्ट्री में बिजली चोरी की जांच ईडी तथा सीबीआई से कराए जाने की मांग की है।
देहरादून प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता करते हुए उत्तराखंड की स्टील फैक्ट्री में हो रही बिजली चोरी को लेकर अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि यदि इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो फिर पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर जनहित में उग्र आंदोलन को बाध्य हो जाएंगे। पार्टी ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तथा सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को भी कर दी हैं।
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के अधिकारी उत्तराखंड के रुड़की और काशीपुर सर्किल मे स्थापित स्टील फैक्ट्रियों में हर महीने 5 crore units, ( जिसकी क़ीमत लगभग 40 करोड़ रुपये है ) की बिजली चोरी करा रहे हैं। जो कि सालाना लगभग 500 करोड़ रुपए का सीधा-सीधा राजस्व का नुकसान है। फिर उसकी भरपाई ईमानदारी से काम करने वाली दूसरी फैक्ट्रियों और आम उपभोक्ता के बिजली बिलों का टैरिफ बढ़कर कर रही है। यह सरासर अन्याय है ।

*चोरों की मौज , बाकी फैक्ट्रियां बंदी की कगार पर*

शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि बिजली चोरी के कारण प्रदेश में ईमानदारी से काम करने वाली फैक्ट्रियां तो लगातार बंद हो रही है लेकिन ऊर्जा निगम की मिली भगत से बिजली चोरी करने वाली फैक्ट्रियां उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से अपना काम समेट करके उत्तराखंड में भट्टियां ( steel furnaces ) बढा रही हैं, जिससे सरकार को विद्युत के राजस्व में तो भारी नुकसान हो ही रहा है वहीं सही ढंग से काम करने वाली फैक्ट्रियां नुकसान के चलते बंदी की कगार पर हैं।
इनमें से 12 steel furnaces तो पिछले 2 साल में ही बन्द हो चुकी हैं ।
बिजली चोरी करने वाली कई फैक्ट्रियों ने चार से लेकर 8,10 तक फर्नेस लगा रखे हैं। लेकिन विद्युत बिल एक ही फर्नेस का दिखा रखा है। बाकी फर्नेस चोरी की बिजली से चल रहे हैं।
बिजली चोरी करने वाली रुड़की लंढोरा तथा काशीपुर सर्कल में लाइन लॉस 65% से 70% तक है। किंतु लाइन लॉस वाले क्षेत्र के नुकसान की भरपाई अन्य क्षेत्रों में भी टैरिफ बढ़ाकर की जा रही है।
हालात यहां तक हो गई है कि बिजली चोरी करने वाली फैक्ट्रियां उत्तर प्रदेश की इकाइयों में काम कम करके उत्तराखंड में ही उत्पादन कर रही हैं और मोनोपोली बनाने के लिए कच्चा माल महंगी दरों पर खरीद रही हैं तथा तैयार माल अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर बेच रहे हैं। इनकी भरपाई तो बिजली चोरी के चलते हो जाती है लेकिन जिन क्षेत्रों में बिजली चोरी नहीं होती तथा लाइन लॉस लगभग जीरो है, उनको महंगा कच्चा माल मिलने के करण वह फैक्ट्रियां प्रतिस्पर्धा से बाहर हो रही हैं और परिणाम स्वरुप बंदी की कगार पर हैं।

*ईडी सीबीआई से जांच की मांग*

राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल ने कहा कि ऊर्जा मंत्री तथा मुख्यमंत्री से मांग की जाती है कि उच्च स्तरीय समिति बनाकर रुड़की लंढोरा सर्कल तथा काशीपुर सर्कल की स्टील फैक्ट्रियों की जांच की जाए तो आपको लगभग 10-12 फैक्ट्री में ही बड़े पैमाने पर बिजली चोरी होते ही मिलेगी।
ईष्टवाल ने कहा कि बाकायदा उच्च स्तरीय अधिकारियों की समिति जांच करें कि यहां पर कितनी लोहे की भट्ठियों का बिजली बिल जमा किया जाता है तथा परिसर में कितनी भट्टियां लगी हुई हैं। इसके साथ ही काशीपुर में भी लाइन लॉस लगभग 70% तक है। यहां पर भी बड़ी फैक्ट्रियों के अंदर भी जाकर बाकायदा यह जांच की जाए कि यहां पर कितनी बिजली की भट्ठियों का बिल जमा किया जाता है तथा हकीकत में कितनी भट्टियां लगी हुई हैं तो साफ हो जाएगा कि इन क्षेत्रों में बिजली की लाइन लॉस के लिए उपरोक्त फैक्ट्रियां सीधे-सीधे जिम्मेदार हैं । यदि इन फैक्ट्री में बिजली चोरी पाई जाती है तो इन सर्कल के विद्युत अधिकारियों तथा इन फैक्ट्री मालिकों,मैनेजरों सबके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। और इस पूरे मामले को आगे की कार्यवाही के लिए ईडी तथा सीबीआई को सौंप दिया जाए।

*सरकार को नीति मे सुधार की भी जरूरत*

राष्ट्रवादी रीजन पार्टी के जिलाध्यक्ष अध्यक्ष देवेंद्र सिंह गुसांई ने कहा कि उत्तराखंड में औद्योगिक प्रदेश बनाने और नए-नए निवेश करने के प्रति सरकार काफी दावे करती है लेकिन सरकार की नीतियों में भी काफी सुधार की जरूरत है।
उदाहरण के तौर पर इतने बड़े स्तर पर बिजली चोरी अकेले सर्कल के अधिकारियों की मिली भगत के चलते नहीं हो सकती, इसके लिए सीधे-सीधे उत्तराखंड पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक स्तर तथा उससे उच्च स्तर के अधिकारी तथा राजनीतिक शह देने वाले लोग भी इसमें शामिल हैं।
उन्होने आरोप लगाया कि बाकायदा ऊंची पहुंच रखने वाले दलाल बिजली चोरी न करने वाली फैक्ट्री को भी बिजली चोरी करने के लिए उकसाते हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
रुड़की काशीपुर के सर्कल में जिन सभी डिवीजन में लाइन लॉस 65% तक है, वहां गौर करने वाली बात यह है कि उन सब डिवीजन में स्टील इंडस्ट्रीज ज्यादा हैं, उनका कनेक्टेड लोड भी उनके टोटल उपभोग का केवल 25% ही है, जबकि उनके पैरेंटल ट्रांसफार्मर की कैपेसिटी कई गुना ज्यादा है।
स्टील फैक्ट्री में 400 केवीए का लोड प्रति टन पर दिए जाने का नियम है यानी 10 तन की भट्टी को 4000 केवीए का लोड चाहिए लेकिन यदि इस परिसर में 10-10 टन के चार फर्नेस स्थापित हों तो फिर उस स्टील फर्नेस को 16000 kva से कम का लोड नहीं देना चाहिए। भले ही फैक्ट्री मालिक यह कहे कि वह तो एक ही फर्नेस चलता है। उसके लिए नियम यह होना चाहिए कि अगर उसके यहां चार फर्नेस स्थापित हैं तो या तो वह चारों चलाएं अथवा तीन को पूरी तरीके से हटा दिया जाए। तभी बिजली चोरी काफी हद तक रुक सकेगी।

*उत्तरप्रदेश की तुलना मे उत्तराखंड की कमजोर नीति को सुधारने की मांग*
शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि पिछले 7 सालों में तो उत्तर प्रदेश में 7 सालों में पांच टैरिफ आए हैं लेकिन किसी भी टैरिफ में बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि उत्तराखंड में पिछले 7 सालों में 7 टैरिफ आ चुके हैं और ₹3 प्रति यूनिट तक इन 7 सालों में विद्युत की टैरिफ बढ़ाई जा चुकी है।

उत्तर प्रदेश की तुलना में ऊर्जा प्रदेश कहलाने वाले उत्तराखंड में बिजली की दरें तीन रुपए प्रति यूनिट बढ़ गई हैं, ऐसे में जो पहले से लगी इंडस्ट्रीज हैं वह कैसे जीवित रह पाएंगे ! इस हालत में नए उद्योगों की स्थापना तो भूल ही जाइए।
इन 7 सालों में उत्तर प्रदेश का टैरिफ 10.50 प्रतिशत लाइन लॉस पर तैयार किया जाता है, जबकि उत्तराखंड में यह लाइन लॉस 13% तक बढ़ गया है।
वहीं उत्तर प्रदेश सरकार टैरिफ में सब्सिडी देती है, जबकि उत्तराखंड सरकार सब्सिडी तो नहीं देती, उल्टा विद्युत उत्पादन पर एक रुपए प्रति यूनिट एक्स्ट्रा वसूलने का काम कर रही है
ऐसे में ऊर्जा प्रदेश कहलाने वाला उत्तराखंड भला कैसे औद्योगिक प्रदेश के रूप में पहचान बना पाएगा !
उत्तराखंड के रुड़की व काशीपुर सर्कल में डेढ़ सौ एमवीए स्टील इंडस्ट्रीज पावर लोड पर 70% तक बिजली चोरी कराई जा रही है। यानी 100 एमवीए, यानी 5 करोड़ यूनिट प्रतिमाह बैठती है। इसकी कीमत लगभग 40 करोड रुपए प्रति महीने बैठती है। यानी हर साल 500 करोड रुपए प्रतिवर्ष का नुकसान हो रहा है।
इस 40 करोड़ रुपए प्रतिमाह की बिजली चोरी से ही ऊपर से नीचे तक बंदर बांट हो रही है और भ्रष्टाचार हो रहा है।
इससे ईमानदारी से काम करने वाली फैक्ट्रियां भी बंद हो रही है तथा जनता पर भी अनावश्यक बढाए गए विद्युत टैरिफ का बोझ पड़ रहा है।

*ये हैं चार सूत्रीय मांग*
1- खास करके रुड़की तथा काशीपुर सर्कल के औद्योगिक क्षेत्र में हो रही बिजली चोरी की जांच उत्तराखंड सरकार ईडी तथा सीबीआई से कराए।
2- उत्तर प्रदेश सरकार की नीति का अनुसरण करते हुए यहां पर भी बिजली का टैरिफ कम से कम 3Rs प्रति unit घटाया जाए
3- लाइन लॉस कम किया जाए ।
4- उत्तराखंड में विद्युत उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विद्युत उत्पादन मे लगी कंपनियों से एक रुपए प्रति यूनिट Royalty, cess, & water tax लिया जाना तत्काल रद्द किया जाए।

*दी है ये चेतावनी*
पार्टी कार्यकर्ताओं ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि उपरोक्त बिजली चोरी पर तत्काल रोक नहीं लगी तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं की गई और इसकी उचित जांच एजेंसी द्वारा जांच नहीं कराई गई तो फिर आम उपभोक्ताओं तथा ईमानदारी से काम करने वाले उद्योगों को अन्याय से बचने के लिए राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी को अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
ऊर्जा निगम तथा सरकार को उपरोक्त मांगों पर कार्रवाई करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाता है यदि उक्त समय अवधि में यथोचित कार्यवाही नहीं की गई तो फिर राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी सड़कों पर उतरकर इसका उग्र विरोध करेगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल , प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल, प्रदेश संगठन सहसचिव राजेंद्र गुसाई, जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह गुसांई, दयाराम मनोरी, विनोद झिकंवाण, आर के जुगरान, नवीन पंत, शांति चौहान, रजनी कुकरेती आदि पदाधिकारी और पार्टी कार्यकर्ता शामिल थे।

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