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उत्तराखंडधर्म–संस्कृति

कोटी गांव में जन्मा नंदा राजजात यात्रा का पवित्र चौसिंग्या खाडू, गांव में उल्लास का माहौल

 

देहरादून/चमोली, 
उत्तराखंड की विश्वविख्यात श्री नंदा देवी राजजात यात्रा की अगुआई करने वाला पवित्र चौसिंग्या खाड़ू (चार सींगों वाली भेड़) चमोली जनपद के कर्णप्रयाग ब्लॉक स्थित कोटी गांव में जन्मा है। इस शुभ समाचार से क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं में हर्ष की लहर दौड़ गई है।

कोटी गांव निवासी हरीश लाल के घर जन्मे इस विशेष खाड़ू को धार्मिक परंपरा में मां नंदा देवी का देव रथ माना जाता है। मान्यता है कि मां नंदा का सामान इस खाडू की पीठ पर रखकर हिमालय स्थित कैलाश तक पहुंचाया जाता है। यह खाडू नंदा राजजात यात्रा की आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

गौरतलब है कि कोटी गांव स्वयं नंदा राजजात यात्रा का पाँचवाँ पड़ाव है, और इस गांव में चौसिंग्या खाड़ू का जन्म लेना धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ माना जा रहा है। परंपरा के अनुसार, यह विशेष भेड़ हर 12 वर्षों में मां नंदा के मायके क्षेत्र (गढ़वाल) में जन्म लेती है।

नंदा देवी राजजात यात्रा, जो हर 12 वर्षों में आयोजित होती है, भारत की सबसे लंबी और कठिन पैदल धार्मिक यात्राओं में से एक है। यह यात्रा चमोली जिले के नौटी गांव से शुरू होकर रूपकुंड व होमकुंड होते हुए संपन्न होती है। यात्रा का अंतिम चरण केवल चौसिंग्या खाडू द्वारा तय किया जाता है।

यह धार्मिक यात्रा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। इसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु व पर्यटक भाग लेते हैं। जंगलों, नदियों, घाटियों और ऊंचे हिमालयी दर्रों से होकर गुजरने वाली यह यात्रा लगभग 19 से 20 दिन में पूरी होती है।

इस बार 2026 में प्रस्तावित नंदा राजजात यात्रा की तैयारियों के बीच चौसिंग्या खाडू के जन्म ने आयोजन को एक नया उत्साह और धार्मिक उल्लास प्रदान किया है  ।

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