---Advertisement---

भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति आराधना में मोह और माया से मुक्ति का संदेश

By: Naveen Joshi

On: Thursday, July 31, 2025 12:41 PM

Google News
Follow Us
---Advertisement---

 

देहरादून,  आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि “हमारी यह सोच कि जो कुछ हमारे पास है, वह स्थायी है — यही मोह है। किसी वस्तु को सदा के लिए अपने पास रखने की इच्छा ही माया कहलाती है।” उन्होंने समझाया कि शरीर, संबंधी, धन-संपत्ति, मान-अपमान — ये सभी अस्थायी हैं और जीवन का वास्तविक उद्देश्य इनके मोह से ऊपर उठकर आत्मकल्याण की ओर बढ़ना है।

बुधवार को गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला में संगीतमय कल्याण मंदिर विधान के 19वें दिन भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति आराधना के दौरान आचार्य सौरभ सागर महाराज ने यह प्रवचन दिए।

उन्होंने कहा, “जब तक जीवन है, उसका सदुपयोग करो। जो चीजें चली जाएं, उन्हें जाने दो। उन्हें पकड़ने या उनके खोने का शोक करने का कोई अर्थ नहीं। यह सब कुछ प्रकृति द्वारा किसी विशेष उद्देश्य हेतु थोड़े समय के लिए हमें दिया गया है। जब उद्देश्य पूर्ण हो जाता है, तो वे वापस ले ली जाती हैं। यह संसार एक स्वप्न की तरह क्षणिक है।”

आचार्य ने भगवान महावीर के वचनों को उद्धृत करते हुए कहा, “वह मोह करो जो भविष्य का स्थायी सुख दे, न कि तात्कालिक सुख जो अंततः पाप में परिणत होता है।”

विधान के पुण्यार्जक जिनवाणी जागृति मंच रहे। कार्यक्रम में महिलाओं की ओर से आचार्यश्री को श्रीफल अर्पित कर 44 कल्याण मंदिर विधान करने का संकल्प लिया गया। साथ ही प्रभु समर्पण समिति की ओर से भी विधान का विधिवत संकल्प लिया गया।

For Feedback - feedback@example.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment