देहरादून , आचार्य श्री 108 सौरभ सागर महाराज के पुष्प वर्षायोग के अंतर्गत आयोजित आठ दिवसीय आध्यात्मिक ज्ञान एवं संस्कार शिक्षण शिविर में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना। शिविर के पहले दिन श्रद्धालुओं ने जैन धर्म के गूढ़ तत्वों का अध्ययन कर आत्मकल्याण एवं धर्मलाभ प्राप्त किया।
- शिविर का शुभारंभ भगवान महावीर स्वामी एवं गणाचार्य पुष्पदंत सागर महामुनिराज के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात प्रवचन देते हुए आचार्य श्री 108 सौरभ सागर महाराज ने कहा कि—
“यदि जीवन में स्थायी सुख चाहिए तो भौतिक सुखों से ऊपर उठकर आत्मज्ञान की ओर बढ़ना होगा। स्वयं को जानना ही सच्चा धर्म है।”
उन्होंने कहा कि वे भले ही सांसारिक गतिविधियों से दूर हैं, किंतु श्रद्धालुओं की साधना, संघर्ष और जीवन की विविध स्थितियों से अवगत रहते हैं। आचार्य श्री ने अपने घर त्याग की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि जब वे गृहस्थ जीवन में थे, तब उनके परिवार में कोई विवाहित नहीं था, लेकिन उनके त्याग के बाद सभी ने गृहस्थ आश्रम को अपनाया और धर्म की ओर प्रवृत्त हुए।
शिविर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और उन्होंने ध्यान, स्वाध्याय, व्रत और तप के माध्यम से आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाने का संकल्प लिया।





