लोक संवर्धन पर्व के दूसरे दिन उमड़ी हजारों की भीड़, शिल्प, संस्कृति और स्वाद का अनूठा संगम
, देहरादून। परेड ग्राउंड में आयोजित छठे लोक संवर्धन पर्व के दूसरे दिन संस्कृति, संगीत और स्वदेशी शिल्प का ऐसा रंग बिखरा कि पूरा परिसर देर रात तक दर्शकों से गुलजार रहा। प्रसिद्ध बॉलीवुड एवं पंजाबी गायिका ज्योति नूरां की दमदार और भावपूर्ण प्रस्तुति ने शाम को यादगार बना दिया। उनके लोकप्रिय गीतों पर हजारों दर्शक झूम उठे और तालियों की गूंज से पूरा पंडाल देर तक गूंजता रहा।
भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा उत्तराखंड सरकार के उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के संयुक्त सहयोग से आयोजित यह पांच दिवसीय महोत्सव देश की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक शिल्प और उद्यमशीलता को एक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है।
महोत्सव में 150 से अधिक स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यहां देशभर के उत्कृष्ट हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र, पारंपरिक कलाकृतियां और क्षेत्रीय व्यंजन बड़ी संख्या में आगंतुकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। मास्टर कारीगरों द्वारा किए जा रहे लाइव क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन ने लोगों को सदियों पुरानी भारतीय शिल्प परंपराओं से रूबरू कराया।
दिनभर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भारतीय संस्कृति, विरासत और लोकजीवन पर आधारित आकर्षक चित्र उकेरे। प्रतियोगिता के परिणाम महोत्सव के अंतिम दिन घोषित किए जाएंगे।
कारीगरों और उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (निसबड) ने एक विशेष ज्ञान सत्र आयोजित किया। राज्य प्रमुख बीरेंद्र सिंह सजवाण और शैलेश रावत ने ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग, व्यवसाय विस्तार और नए बाजारों तक पहुंच जैसे विषयों पर उपयोगी जानकारी साझा की, जिससे प्रतिभागियों को अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने के व्यावहारिक सुझाव मिले।
उत्तराखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की जीवंत परंपराओं और कारीगरों की अद्भुत प्रतिभा का उत्सव है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से कारीगरों को नए बाजार और स्थायी आजीविका के अवसर मिल रहे हैं।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम की निदेशक दीप्ति सिंह ने कहा कि यह महोत्सव शिल्प, संस्कृति और नवाचार को एक साथ जोड़ने वाला सशक्त मंच बन चुका है, जो देश की पारंपरिक विरासत के संरक्षण के साथ कारीगरों को नई पहचान भी दिला रहा है।
शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज उत्तराखंड के लोकप्रिय लोकगायक नरेश बादशाह की जोशीली प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने ‘जय देवा महासू महाराजा’, ‘दर्शणिये’, ‘हो रेशमा’ और ‘खुदकु-जयंती’ जैसे लोकप्रिय लोकगीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके बाद मंच पर पहुंचीं प्रसिद्ध गायिका ज्योति नूरां, जिन्होंने ‘पटाखा गुड्डी’, ‘वारी जावां’, ‘तेरा नूर’ और ‘पांव की जुत्ती’ जैसे सुपरहिट गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। उनकी सूफियाना और ऊर्जावान गायकी पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे।
महोत्सव के फूड कोर्ट में आगंतुकों ने पारंपरिक गढ़वाली, कुमाऊंनी और देश के विभिन्न राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजनों का भी भरपूर आनंद लिया।
लोक संवर्धन पर्व 15 जुलाई तक प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे से रात 9:00 बजे तक परेड ग्राउंड में आयोजित होगा। प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है।
13 जुलाई को उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक कलाकार किशन महिपाल, विवेक नौटियाल और माया उपाध्याय अपनी प्रस्तुतियों से महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या को और अधिक रंगीन बनाएंगे।









