देहरादून, । उत्तराखंड की स्थानीय उपज और युवा प्रतिभा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान बनाई है। दिल्ली में आयोजित नेशनल बरिस्ता चैंपियनशिप के प्रीलिम्स में देहरादून के विंटरलाइन कॉफी रोस्टर्स के बरिस्ता तुषार अरोड़ा ने उत्तराखंड की पारंपरिक स्थानीय सामग्री मुनस्यारी के बुरांश और चंपावत के शहद का अभिनव प्रयोग कर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।
तुषार ने प्रतियोगिता में कॉफी के साथ उत्तराखंड के पहाड़ों की खुशबू और स्वाद को जोड़ते हुए मुनस्यारी के बुरांश तथा चंपावत के शहद को विशेष रूप से प्रस्तुत किया। उनकी इस अनूठी प्रस्तुति ने दिल्ली में कॉफी प्रेमियों और निर्णायकों का ध्यान आकर्षित किया। स्थानीय सामग्री के इस प्रयोग को उत्तराखंड के उत्पादों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
तुषार अरोड़ा का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करना ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के युवाओं को पेशेवर बरिस्ता के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना तथा प्रदेश की स्थानीय उपज को नए बाजारों तक पहुंचाना भी है।
कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित नेशनल बरिस्ता चैंपियनशिप को कॉफी उद्योग के प्रमुख आयोजनों में माना जाता है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से चयनित प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता के प्रीलिम्स में हिस्सा लिया। इनमें से शीर्ष 16 प्रतिभागी अब राष्ट्रीय खिताब के लिए अगले चरण में मुकाबला करेंगे।
उत्तराखंड से तुषार अरोड़ा की भागीदारी ने प्रदेश की स्थानीय सामग्री, कॉफी संस्कृति और युवा प्रतिभा को एक साथ राष्ट्रीय मंच प्रदान किया है। बुरांश और चंपावत के शहद के माध्यम से उन्होंने यह संदेश भी दिया कि उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पाद आधुनिक प्रयोगों के साथ देश-दुनिया के बाजार में नई पहचान बना सकते हैं।













