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बदरीनाथ धाम की धार्मिक मर्यादा और पवित्रता का संरक्षण जरूरी: पंडा पंचायत

By: Naveen Joshi

On: Wednesday, September 30, 2026 1:20 PM

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बदरीनाथ धाम की धार्मिक मर्यादा, सनातन परंपराओं एवं पवित्रता को लेकर श्री बदरीनाथ पंडा पंचायत ने चिंता व्यक्त की है। पंचायत ने उत्तराखंड सरकार के धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज द्वारा शंख के संबंध में दिए गए बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि श्री बदरीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का परम केंद्र है। ऐसे में धाम से जुड़ी धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के संबंध में सार्वजनिक रूप से व्यक्त किए जाने वाले प्रत्येक कथन में शास्त्रीय संदर्भ और धार्मिक संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है। मंत्री के शंख संबंधी बयान पर हाल में धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

पंडा पंचायत के अनुसार, श्री बदरीनाथ धाम केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सनातन आस्था, आध्यात्मिक परंपरा और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का पवित्र धाम है। धाम की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं, पूजा-पद्धतियों और मर्यादाओं का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

पंचायत ने कहा कि वर्तमान समय में बदरीनाथ धाम की धार्मिक गरिमा, परंपराओं एवं पवित्रता को लेकर जिस प्रकार के प्रश्न और चर्चाएं सार्वजनिक रूप से सामने आ रही हैं, वे निश्चित रूप से गंभीर विषय हैं। धाम की प्राचीन परंपराओं और व्यवस्थाओं को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए तीर्थ पुरोहितों, हक-हकूकधारियों, संत समाज, स्थानीय प्रतिनिधियों तथा शासन-प्रशासन के बीच सार्थक और नियमित संवाद आवश्यक है।

पंडा पंचायत ने सरकार से आग्रह किया कि श्री बदरीनाथ धाम से जुड़े धार्मिक एवं पारंपरिक विषयों पर किसी भी निर्णय अथवा सार्वजनिक विमर्श के दौरान स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों की भावनाओं, पारंपरिक अधिकारों तथा धार्मिक ज्ञान को उचित महत्व दिया जाए।

पंचायत ने कहा कि बदरीनाथ धाम की महिमा और धार्मिक परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं। इन परंपराओं का संरक्षण केवल वर्तमान पीढ़ी का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति भी हमारा दायित्व है। धाम की पवित्रता, गरिमा और सनातन धार्मिक मर्यादा को अक्षुण्ण रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

श्री बदरीनाथ पंडा पंचायत (रजि.) के अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी ने कहा कि धाम की धार्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर संवाद और निर्णय की प्रक्रिया में स्थानीय धार्मिक पक्ष की सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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