देहरादून, ग्राफिक एरा में विशेषज्ञों ने कहा कि हिमालय के वस्त्र पहाड़ की धड़कन हैं, जिनके हर धागे में बर्फीली हवाओं से लड़ने का हुनर और पीढ़ियों का अनुभव बुना है। ऊन और पश्मीना की गर्माहट, भांग और बिच्छू घास के मज़बूत रेशे, और करघे पर उकेरे रंग-बिरंगे पैटर्न इन वस्त्रों को ऊँचाई की कठोर परिस्थितियों के अनुकूल बनाते हैं।
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में आज हिमालयी वस्त्र: परंपरा, तकनीक और टिकाऊ भविष्य पर आयोजित संगोष्ठी के समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि सहायक निदेशक (हस्तशिल्प), श्री गोपेश कुमार मौर्य ने कहा कि उत्तराखंड की हस्तशिल्प परंपरा राज्य की सांस्कृतिक पहचान और आजीविका की रीढ़ है।
संगोष्ठी में 13 रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए। न्यूयॉर्क और ब्रिटेन के प्रतिनिधियों के साथ देशभर से रिसर्च स्कॉलर और शोधार्थी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े और उन्होंने अपने रिसर्च पेपर और सार प्रस्तुत किए।
संगोष्ठी का आयोजन यूनिवर्सिटी के फैशन डिज़ाइनिंग डिपार्टमेंट, टेक्सटाइल्स एंड क्लोथिंग रिसर्च सेंटर और जयपुर के भारतीय शिल्प संस्थान (आईआईसीडी) ने संयुक्त रूप से किया। संगोष्ठी में कुलसचिव डॉ ज्योति छाबड़ा, शिक्षक शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।













