देहरादून। देवभूमि देहरादून में वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन श्रद्धा, भक्ति और धर्मरक्षा के संकल्प के साथ मनाया गया। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद तथा परम पूज्य आध्यात्मिक श्रमणी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी के दिव्य सान्निध्य में श्री 1008 श्रेयांसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक एवं वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन के पावन अवसर पर गांधी रोड स्थित श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर एवं जैन भवन धर्मशाला में बृहत रक्षाबंधन विधान का भव्य आयोजन हुआ।
प्रातःकाल मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण के बीच 6:40 बजे अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यनियम पूजन संपन्न हुआ। इसके पश्चात विधि-विधान एवं धार्मिक मंत्रोच्चार के साथ बृहत रक्षाबंधन विधान प्रारंभ हुआ। विधान के दौरान 31 मंडलों पर 700 अर्घ समर्पित किए गए। वहीं भगवान श्री श्रेयांसनाथ के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधिवत निर्वाण लाडू अर्पित कर मोक्षमार्ग की मंगलकामना की।
देहरादून में पहली बार हुआ अनूठा आयोजन
देवभूमि उत्तराखंड में 700 दिगंबर मुनिराजों की रक्षा की स्मृति में इस प्रकार का भव्य बृहत रक्षाबंधन विधान देहरादून में पहली बार आयोजित किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने उत्साह एवं श्रद्धाभाव के साथ सहभागिता की। पूरे मंदिर परिसर में धार्मिक जयघोष, मंत्रोच्चार और भक्ति की धारा प्रवाहित होती रही।
रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज को समर्पित विशाल एवं सुंदर राखी अर्पित की गई। इसके साथ ही परम पूज्य गुरु मां आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी को भी श्रद्धापूर्वक राखी भेंट की गई।
“रक्षाबंधन पर मुनि रक्षा का संकल्प उठाएं हम”
इस अवसर पर पूज्य आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ने अपने मंगल आशीर्वचन में कहा, “रक्षाबंधन पर मुनि रक्षा का संकल्प उठाएं हम। वात्सल्य पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।” उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म, साधु-संतों और संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने का संदेश दिया।
700 मुनिराजों की रक्षा से जुड़ी है रक्षाबंधन की जैन परंपरा
जैन परंपरा में रक्षाबंधन पर्व का संबंध महामुनि विष्णुकुमार द्वारा 700 दिगंबर मुनिराजों की प्राणरक्षा की पावन एवं प्रेरणादायी घटना से माना जाता है। प्राचीन धार्मिक मान्यता के अनुसार आचार्य अकंपनाचार्य के नेतृत्व में 700 दिगंबर मुनिराज एक स्थान पर विराजमान थे। इसी दौरान राजा बलि अथवा उसके मिथ्यात्वी मंत्रियों द्वारा द्वेषभावना के कारण मुनिराजों पर भयंकर उपसर्ग किया गया।
जब अवधिज्ञानी महामुनि विष्णुकुमार को मुनिराजों पर आए इस संकट का ज्ञान हुआ तो वे तत्काल वहां पहुंचे। अपनी तपश्चर्या एवं ऋद्धि के प्रभाव से उन्होंने उपसर्ग का निवारण किया और 700 मुनिराजों के प्राणों की रक्षा की।
धर्म एवं साधु-संतों की रक्षा की इस महान घटना की स्मृति में जैन समाज में रक्षाबंधन पर्व को केवल भाई-बहन के प्रेम के पर्व के रूप में ही नहीं, बल्कि वात्सल्य, धर्मरक्षा, साधुरक्षा और अहिंसा के संकल्प के रूप में भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।
कार्यक्रम में जैन समाज की विद्या-समय-पूर्ण वर्षायोग समिति के गणमान्य सदस्य एवं पदाधिकारी, जैन भवन के सदस्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत वातावरण में संपन्न हुए इस आयोजन ने रक्षाबंधन पर्व के धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्वरूप को नई गरिमा प्रदान की।
रक्षाबंधन पर धर्मरक्षा का संकल्प, 700 मुनिराजों की स्मृति में देहरादून में पहली बार बृहत विधान
By: Naveen Joshi
On: Friday, August 28, 2026 4:55 PM













