देहरादून। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में आयोजित ‘भव्य रामलीला महोत्सव–2026’ के नवम दिवस को ‘साहित्य एवं फिल्म दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर मेघनाद वध, कुंभकर्ण वध और रावण वध का भव्य मंचन किया गया। आधुनिक लेज़र तकनीक, डिजिटल इफेक्ट्स और प्रकाश एवं ध्वनि के शानदार संयोजन ने रामलीला को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम में बॉलीवुड एवं दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री नेहा सक्सेना सहित साहित्य, समाजसेवा और कला जगत से जुड़ी कई हस्तियां मौजूद रहीं।
महोत्सव के दौरान उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, साहित्य और क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर उत्तराखंड के लोकजीवन और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाली फिल्म ‘घस्यारी’ का ट्रेलर भी लॉन्च किया गया। फिल्म जगत से जुड़ी प्रतिभाओं को सम्मानित कर स्थानीय कलाकारों, साहित्यकारों और फिल्म निर्माताओं को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।
लेज़र तकनीक से सजी राम-रावण युद्ध की लीला
रामलीला मंचन के दौरान मेघनाद और कुंभकर्ण वध के बाद प्रभु श्रीराम और रावण के बीच हुए भीषण युद्ध का प्रभावशाली चित्रण किया गया। चारों दिशाओं में चमकती लेज़र किरणों, डिजिटल युद्ध दृश्यों और ध्वनि प्रभावों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। माता सीता की अग्नि परीक्षा का दृश्य भी डिजिटल अग्नि प्रभावों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। अंततः रावण वध के साथ अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया गया।
पुरानी टिहरी की विरासत को जीवंत करना सराहनीय : विक्रम सिंह नेगी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रतापनगर विधायक विक्रम सिंह नेगी ने कहा कि पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक संस्कृति और रामलीला की गौरवशाली परंपरा को देहरादून में इतने भव्य स्वरूप में पुनर्जीवित करना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर के प्रयासों से यह ऐतिहासिक कार्य संभव हो पाया है। टिहरी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखते हुए नई पीढ़ी तक पहुंचाना सराहनीय और अनुकरणीय प्रयास है।
बॉलीवुड एवं दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री नेहा सक्सेना ने आयोजन की भव्यता की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह दक्षिण भारत सहित देश के विभिन्न हिस्सों में कई कार्यक्रमों में शामिल हुई हैं, लेकिन इतनी भव्य रामलीला उन्होंने पहले नहीं देखी। उन्होंने समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर और पूरी आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया।
एक करोड़ दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य
श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952 के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि वर्ष 1952 से चली आ रही पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला परंपरा को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित करना समिति का महत्वपूर्ण संकल्प रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में इस रामलीला को डिजिटल माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। इस वर्ष समिति ने एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उन्होंने कहा कि ‘साहित्य एवं फिल्म दिवस’ मनाने का उद्देश्य केवल फिल्म जगत की हस्तियों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि उत्तराखंड के स्थानीय कलाकारों, साहित्यकारों, लोककलाओं और क्षेत्रीय सिनेमा को भी व्यापक मंच प्रदान करना है। ‘घस्यारी’ जैसी फिल्मों के माध्यम से राज्य की लोकसंस्कृति और सांस्कृतिक पहचान को देशभर में पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें।
20 अक्टूबर को होगा 80 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन
समिति के अनुसार, 20 अक्टूबर को शाम चार बजे 80 फीट ऊंचे एलईडी एवं लेज़र युक्त रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। आयोजन में मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी प्रस्तावित है। समिति ने इसे उत्तराखंड में एलईडी एवं लेज़र तकनीक से सजे पुतलों के दहन का विशेष आयोजन बताया है। रंग-बिरंगी एलईडी रोशनी, लेज़र प्रभावों और आतिशी दृश्यों के बीच होने वाला यह कार्यक्रम दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रतापनगर विधायक विक्रम सिंह नेगी, अभिनेत्री नेहा सक्सेना, बार काउंसिल उत्तराखंड के चेयरमैन राकेश गुप्ता, समाजसेवी दिनेश चमोली, अनूप नौटियाल, हिमालय विरासत ट्रस्ट की अध्यक्ष आशना कंडियाल नेगी, वरिष्ठ साहित्यकार भारती पांडे, दीपक ड्यूंडी, ऑटो ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष मनिंदर बिष्ट, पिया थापा, घनश्याम वर्मा, पार्षद देवेंद्र पाल सिंह मोंटी और डी.एस. मान सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
समिति की ओर से अध्यक्ष अभिनव थापर, सचिव अमित पंत, निर्देशक अनुराग पंत, पदाधिकारी, कलाकार और सदस्य भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राकेश भट्ट और भारती आनंद ने किया।
समिति ने देहरादून सहित प्रदेशवासियों से सपरिवार श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स पहुंचकर महोत्सव में भाग लेने और प्रभु श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने की अपील की।













