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समालखा में 23 अक्टूबर से सजेगा 79वां निरंकारी संत समागम, तैयारियां अंतिम चरण में

By: Naveen Joshi

On: Sunday, October 18, 2026 5:53 PM

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देहरादून, । सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में 79वां वार्षिक निरंकारी संत समागम 23 से 26 अक्टूबर तक संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा में आयोजित किया जाएगा। समागम में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं और संत-महात्माओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।

समागम स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशाल पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही आवागमन, बैठने और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। परिसर में अत्याधुनिक एलईडी स्क्रीन लगाई जा रही हैं, जिससे दूर बैठे श्रद्धालु भी सत्संग, भजन और आध्यात्मिक विचारों का सहज रूप से लाभ उठा सकेंगे।

संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिंदर सुखीजा ने बताया कि सतगुरु माता जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से समागम की तैयारियां व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ रही हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुचारु संचालन और बेहतर प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए पूरे परिसर को चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। उन्होंने कहा कि संतों और श्रद्धालुओं की निस्वार्थ सेवा, समर्पण और सामूहिक सहयोग से समागम स्थल एक भव्य एवं सुव्यवस्थित आध्यात्मिक नगरी का स्वरूप ले चुका है।

समागम स्थल पर श्रद्धालुओं द्वारा तैयार किया गया मुख्य स्वागत द्वार भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसकी कलात्मक बनावट और भव्य स्वरूप सेवा, समर्पण, सृजनशीलता तथा सामूहिक श्रद्धा की भावना को दर्शाता है। आयोजन की तैयारियों में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक जुटे हुए हैं, जो सेवा भाव के साथ विभिन्न व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में योगदान दे रहे हैं।

आयोजकों के अनुसार, निरंकारी संत समागम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान, भक्ति, सेवा और आत्मिक जागृति का महत्वपूर्ण अवसर है। समागम के माध्यम से श्रद्धालुओं को परमात्मा से जुड़ने के साथ-साथ विश्वबंधुत्व, आपसी सौहार्द, प्रेम और निस्वार्थ सेवा जैसे मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी जाती है।

समागम का उद्देश्य मानव जीवन में आध्यात्मिक चेतना को जागृत करना और लोगों को बाहरी उपलब्धियों से आगे बढ़कर आंतरिक शांति एवं आध्यात्मिक समृद्धि का महत्व समझाना है। आयोजकों ने देश-विदेश से आने वाले सभी श्रद्धालुओं और संत-महात्माओं का स्वागत करते हुए समागम में सहभागी बनने का आमंत्रण दिया है।

 

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