देहरादून, किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए युवा वैज्ञानिक फसलों की निगरानी व प्रबंधन करने वाला सिस्टम तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा वे दृष्टिहीन व वधिर लोगों की जिंदगी आसान बनाने वाला उपकरण भी बना रहे हैं।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित ग्राफ -थॉन के दूसरे दिन भी 26 राज्यों के छात्र-छात्राएं प्रोटोटाइप बनाने में डटे रहे। इस रोमांचक मुकाबले में 36 टीमें पिछले 24 घंटों से लगातार अपने आइडियाज को प्रोटोटाइप का रूप देने की कोशिशों में लगी हुई हैं। उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/ मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रक्षा व अन्य अग्रणी तकनीकों के क्षेत्र में विभिन्न राज्यों व देश की ज्वलंत समस्याएं दी गई हैं। मुकाबले के दौरान आने वाली दिक्कतों को सुलझाने में ग्राफिक एरा के विशेषज्ञ छात्र- छात्राओं को लगातार तकनीकी सलाह देकर राह दिखा रहे हैं।
इस मुकाबले में फसलों की निगरानी व प्रबंधन करने वाला सिस्टम, दृष्टिहीन व वधिर लोगों की जिंदगी आसान बनाने वाला उपकरण, सुरक्षा का उल्लंघन करने वाले बाहरी व्यक्तियों का पता लगाने वाला डिवाइस, विश्वविद्यालयों के हॉस्टल में रह रहे छात्र-छात्राओं के लिए मैस से खाना ऑर्डर करने वाला ऐप, फ्रीलांसर उद्यमियों के लिए व्यापार बढ़ाने में सहायक एआई चैट बॉट, अवसाद से जूझ रहे लोगों में गेम्स, साउंड थेरेपी, एक्सरसाइज व अन्य गतिविधियों की मदद से मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने वाला ऐप और एआई पर आधारित कैंपस टूर गाइड जैसे प्रोटोटाइप शामिल हैं।
ग्राफिक एरा ने इस मुकाबले में विजयी टीमों को नगद इनाम व अन्य आकर्षक पुरस्कार देने का ऐलान किया है। छात्राओं को बढ़ावा देने व पर्यावरण संरक्षण की श्रेणी में भी विजेताओं को पुरस्कृत किया जायेगा।
इसके साथ ही स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहायता व ग्राफिक एरा के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा।
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