देहरादून/नई दिल्ली, छः वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलास मानसरोवर यात्रा का मार्ग खुल गया है। भारत और चीन के बीच पूर्व में बनी सहमति के आधार पर इस पवित्र यात्रा की बहाली की गई है। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक कार्यक्रम में यह घोषणा की कि इस वर्ष कुल 750 यात्रियों को यात्रा की अनुमति दी गई है। इन भाग्यशाली यात्रियों का चयन लाट्री प्रणाली (लॉटरी सिस्टम) के माध्यम से किया गया है।
इस लाट्री को विदेश राज्यमंत्री श्री कीर्ति वर्द्धन सिंह ने कंप्यूटर आधारित प्रणाली के ज़रिए निकाला, जिसे पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बताया गया है।
इस वर्ष यात्रा के लिए 5,561 लोगों ने पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराया था, जिनमें से लाट्री द्वारा 750 यात्रियों का चयन किया गया। यात्रा जून से अगस्त के बीच आयोजित की जाएगी।कुल 15 जत्थे कैलास मानसरोवर के लिए रवाना होंगे।हर जत्थे में 50 तीर्थयात्री होंगे। 1. लिपुलेख मार्ग (उत्तराखंड):इसमें 5 जत्थे भेजे जाएंगे। यह मार्ग पहाड़ी लेकिन पारंपरिक है। 2. नाथु ला मार्ग (सिक्किम):10 जत्थे इस मार्ग से यात्रा करेंगे। यह मार्ग अब पहले से अधिक सुविधाजनक और वाहन-योग्य (motorable) बना दिया गया है।
यात्रियों को इस रूट पर कम पैदल यात्रा करनी पड़ंगे
कैलास मानसरोवर, जो कि तिब्बत (चीन प्रशासित क्षेत्र) में स्थित है, हिंदू, बौद्ध, जैन और बों धर्मों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है।यह यात्रा भारत-चीन संबंधों और सीमावर्ती क्षेत्रीय सहयोग का प्रतीक भी मानी जाती है।सुरक्षा, मौसम और भू-राजनीतिक कारणों से पिछले कुछ वर्षों से यात्रा पर रोक थी, जो अब हटाई गई
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा मार्ग पर बुनियादी ढांचे में सुधार किया गया है।
सड़क मार्ग बेहतर होने के कारण अब यात्रियों को शारीरिक थकावट कम होगी। सरकार यात्रियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षा उपाय और गाइडेड समर्थन भी प्रदान करेगी।
कैलास मानसरोवर यात्रा को पुनः शुरू किया जाना धार्मिक आस्था, राजनयिक सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव की दिशा में एक बड़ी पहल है।
यह उन हजारों श्रद्धालुओं के लिए भी आशा की किरण है, जो वर्षों से इस यात्रा का सपना देख रहे थे।
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