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उत्तराखंड के गौरव भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण

By: Naveen Joshi

On: Sunday, May 24, 2026 7:22 PM

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देहरादून,उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल Bhagat Singh Koshyari को 25 मई को राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा नई दिल्ली में पद्मभूषण सम्मान से अलंकृत किया जाएगा।

उत्तराखंड में ‘भगत दा’ के नाम से लोकप्रिय  कोश्यारी को सामाजिक सेवा, शिक्षा, पत्रकारिता और राष्ट्र निर्माण में उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जा रहा है।

17 जून 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के दूरस्थ गांव पलानधुरा में जन्मे श्री भगत सिंह कोश्यारी ने साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर शिक्षा और जनसेवा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और प्रारंभिक दौर में उत्तर प्रदेश के एटा जनपद में व्याख्याता के रूप में कार्य किया।

शिक्षा को समाज परिवर्तन का माध्यम मानते हुए उन्होंने वर्ष 1966 में सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ की स्थापना की। इस पहल ने दूरदराज पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार को नई दिशा दी। उन्होंने विवेकानंद इंटर कॉलेज की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा शिक्षा और संस्कार आधारित संस्थाओं के विकास में सक्रिय योगदान दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित स्वयंसेवक रहे  कोश्यारी ने लंबे समय तक सामाजिक और संगठनात्मक दायित्व निभाए। उन्होंने हिंदी साप्ताहिक ‘पर्वत पीयूष’ का प्रकाशन शुरू कर सामाजिक जागरूकता और जनचेतना को मजबूती देने का कार्य भी किया। आपातकाल के दौरान उन्हें मीसा के तहत गिरफ्तार भी किया गया था।

राजनीतिक जीवन में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वर्ष 1997 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए नामित किया गया। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वह राज्य की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और बाद में उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई।

वर्ष 2008 में वह राज्यसभा सदस्य चुने गए और 2014 में नैनीताल-ऊधम सिंह नगर लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए। ऊर्जा मंत्री के रूप में उन्होंने टिहरी जल विद्युत परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संसद में उन्होंने वन रैंक वन पेंशन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया।

5 सितंबर 2019 को उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य के लगभग सभी जिलों और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया। अगस्त 2020 में उन्हें गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया।

भगत सिंह कोश्यारी एक लेखक के रूप में भी जाने जाते हैं। उनकी पुस्तकें “उत्तरांचल प्रदेश क्यों” और “उत्तरांचल प्रदेश : संघर्ष एवं समाधान” उत्तराखंड के विकास और राज्य निर्माण की उनकी सोच को प्रतिबिंबित करती हैं।

उनका जीवन शिक्षा, राष्ट्रसेवा, सादगी और जनसमर्पण का प्रेरक उदाहरण माना जाता है।

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