क्लस्टर स्कूल योजना के विरोध में उमट्टा, कालेश्वर और बरसाली के ग्रामीणों ने भेजा ज्ञापन
चमोली (प्रदीप लखेड़ा) क्लस्टर स्कूल योजना के विरोध में चमोली जिले की ग्राम पंचायत उमट्टा, कालेश्वर और बरसाली के ग्रामीणों ने एकजुट होकर खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भेजा। ग्रामीणों का कहना है कि यह योजना ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाली और जनविरोधी है।
समाजसेवी अरविंद सिंह चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में क्लस्टर स्कूल की अवधारणा का उद्देश्य शिक्षण की गुणवत्ता, संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाना है, लेकिन इसमें कहीं भी स्कूलों के विलय, समायोजन या बंद करने का उल्लेख नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार जिस तरीके से इस योजना को लागू कर रही है, उससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। इससे शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के पद भी समाप्त हो सकते हैं, जो कि शिक्षा क्षेत्र में एक गंभीर संकट पैदा करेगा।
चौहान ने बताया कि चमोली जिले में प्रथम चरण के तहत 35 क्लस्टर स्कूलों में 122 स्कूलों का समायोजन प्रस्तावित है, जिसका सीधा अर्थ है कि लगभग 75 प्रतिशत स्कूल स्थायी रूप से बंद हो सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि कर्णप्रयाग विकासखंड में ग्राम पंचायत उमट्टा का हाई स्कूल भी इस योजना के तहत कर्णप्रयाग में शामिल कर लिया गया है। ग्रामीणों ने इसे अव्यवहारिक और छात्र विरोधी निर्णय बताया।
इस नीति के विरोध में उमट्टा, कालेश्वर और बरसाली के ग्रामीणों और अभिभावकों ने हाई स्कूल उमट्टा में एक बैठक कर एक सुर में इस योजना को निरस्त करने की मांग की और इसका ज्ञापन खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा।
ग्रामीणों ने सरकार से अपील की है कि किसी भी निर्णय से पहले सभी हितधारकों से विस्तृत संवाद और विमर्श किया जाए ताकि शिक्षा व्यवस्था को हानि न पहुंचे।
