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भारत संकीर्ण नहीं महाभारत है : बापू

By: Naveen Joshi

On: Friday, August 15, 2025 9:59 PM

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नई दिल्ली। राम कथा के सातवां दिन के आरंभ पर मोरारी बापू ने सबको स्वतंत्रता दिन की बहुत बधाई दी। इससे पहले सुबह भी खास कार्यक्रम में बापू ने अपने हाथों से राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

जिन लोगों ने अपने जीवन का बलिदान दिया वो सब शहीदों को स्मरण करते हुए बापू ने कहा कि भारत संकीर्ण नहीं महाभारत है। स्वतंत्रता के लिए जो जो मुल्क ने अभियान चलाए सबको बापू ने बधाई दी और राष्ट्र देवो भव के साथ यह भी बताया कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा जो अनेक रूप से व्याख्याहित किया गया है। किसी ने सामाजिक रूप से, किसी ने राजकीय रूप से, किसी ने धर्म मुल्क के आधार पर अर्थ घटन किया है। लेकिन आज में आध्यात्मिक अर्थ घटन करना चाहता हूं। क्योंकि अध्यात्म सब धर्म से ऊपर है।

हमारे राष्ट्रध्वज में सबसे ऊपर जो गेरुआ भगवा रंग है वह शिवजी का रंग है। यह कोई संप्रदाय सामान्य अर्थ नहीं समझना। यह त्याग और बलिदान शहीदी का प्रतीक है। यह विश्व कल्याण का रंग है। उषा और लालीमा का गेरुआ प्राकृतिक अस्तित्व का रंग है। ब्रह्मा संध्या के पीछे भागे यह रूपक भी बापू ने बताया।

बीच में जो हरा रंग है वह कृष्ण का ह। कृष्ण जहां रहा जहां गया सब हरा भरा रहा।पूरी दुनिया हरी-भरी है,कृष्ण के कारण।और राम का रंग श्वेत है।श्वेत रंग उदासीनता का प्रतीक है।निष्कलंक उदासीनता है।

और तिरंगे के बीच में जो चक्र है वह बुद्ध का धर्म चक्र है। तिरंगा का यह आध्यात्मिक अर्थ है।

आज बापू ने हमारे फील्ड मार्शल जनरल माणेकशॉ का एक अद्भुत प्रसंग भी बताया। जब वह निवृत होने वाले थे।15 दिन की बात थी। तब मानेकशॉ के ड्राइवर ने कहा कि अब मैं नौकरी नहीं करने वाला। मैं नौकरी छोड़ने जा रहा हूं और इस्तीफा कबूल करो। माणेक शॉ ने बहुत बताया तब रोने लगा और बहुत पूछा तो कहा कि मानेकशॉ के घर कार चलाई अब मैं और किसी की नौकरी करने वाला नहीं हूं। तब जनरल मानेक शॉ ने कहा कि थोड़े दिनों के बाद मेरे निवृत्ति का समारंभ होने वाला है उन दिनों में आप मेरे पास आना। और वह दिन आया। सब लोग आए। मानेकशॉ का सम्मान किया गया और आखिर में मानेक शॉ ने अपने नौकर को बुलाया और एक लिफाफा देकर कहा कि यह लिफाफा घर जाकर अपने परिवार के पास खोलना। और जब परिवार के पास खोला तो वहां जनरल मानेक शॉ को हरियाणा गवर्नमेंट ने 25 एकड़ जमीन दी थी वह सब ड्राइवर के नाम कर दी थी। यह है आम और खास आदमी के बीच का संबंध।

आज भंते जी मैत्री ने भी एक प्रश्न कहा कि नन्हा सा पात्र हो और गंगा का जल लगातार उनमें बढ़ता ही जा रहा हो।भरता ही जा रहा हो। गंगा रुकने वाली नहीं है। वही दशा आश्रित की होती है। कोई बुद्ध पुरुष लगातार कृपा बरसाने लगता है तो उसे कैसे पचाना? कैसे बचाना? बापू ने कहा कि आश्रित को कोई चिंता करने की जरूरत नहीं। बस इतना ध्यान रखो कि अपना पात्र उल्टा मत करना। पात्र में छिद्र ना हो जाए और पात्र में कोई मलिनता कचरा ना रहे उनका ध्यान रखना। इतना अनुग्रह हो जाए कि पात्र और अपात्र भी भूल जाए। पात्रता भी बह जाए। अनुग्रह पात्रता देखता ही नहीं।

हमारे पास चार वस्तु होती है: शरीर,शरीर से छोटा प्राण,उनसे भी छोटी आत्मा और सूक्ष्म में भी सूक्ष्म और विराट से विराट परमात्मा। सब की रक्षा राम करते हैं। हम शरीर की सजावट करते हैं, रक्षा राम करते हैं।। सीता जी अग्नि में रही हनुमान जी भी अग्नि में रहे दोनों की रक्षा राम ने की है। लक्ष्मण के प्राण की रक्षा राम ने की है।आत्मरक्षा भी राम ने की है।हमारे अंदर रहे परमात्मा की रक्षा भी राम करते हैं। मन की रक्षा चंद्र और सूर्य की रक्षा राम करते हैं सभी अष्ट तत्व की रक्षा राम करते हैं। विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा राम ने की है और अहल्या की रक्षा भी राम करते हैं।। छ प्रकार के मृत्यु होते हैं काल मृत्यु, अकाल मृत्यु,अरेंज मृत्यु,सहज मृत्यु और इच्छा मृत्यु।

राम जन्म के बाद अयोध्या में एक महीने तक का दिन हुआ।बहुत उत्सव चला। बाद में चारों भाइयों के नामकरण हुए। यज्ञोपवीत संस्कार हुआ। विद्या संस्कार हुआ और विश्वामित्र अपने यज्ञ की रक्षा के लिए राम लक्ष्मण को लेकर निकले। बीच रास्ते में ताड़का का वध किया। मरीच को दंडित किया सुबाहु को निर्वाण देकर जनक के नगरी में राम ने पहले रात्रि मुकाम किया।

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Naveen Joshi

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