देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियां तेज हो गई हैं। पार्टी हाईकमान जल्द ही नए मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप दे सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस बार नए चेहरों को मौका मिलने के साथ ही मौजूदा मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी होगी।
लोकसभा क्षेत्रों पर आधारित प्रतिनिधित्व
जानकारी के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार में इस बार गढ़वाल-कुमाऊं संतुलन के बजाय लोकसभा क्षेत्रों के आधार पर प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई जा रही है। हर लोकसभा क्षेत्र से दो विधायकों को मंत्री बनाए जाने का फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है। खास बात यह है कि अब तक प्रतिनिधित्व से वंचित हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
सीएम आवास पर बढ़ी हलचल
कैबिनेट विस्तार की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री धामी के कैंप कार्यालय और सचिवालय में विधायकों की आवाजाही बढ़ गई है। हाल ही में मंत्री रेखा आर्या, विधायक शक्तिलाल शाह, दुर्गेश्वर लाल, रेनू बिष्ट, खजान दास और कई अन्य नेता सीएम से मुलाकात कर चुके हैं।
धामी मंत्रिमंडल में वर्तमान में 5 पद रिक्त हैं। 2022 से ही कुछ पद खाली हैं, जबकि 2023 में मंत्री चंदन राम दास के निधन और 2025 में वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद रिक्तियों की संख्या बढ़ गई। हाईकमान के निर्देश पर मौजूदा मंत्रियों के कामकाज का मूल्यांकन किया जा रहा है। जिनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया, उन्हें संगठन में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है।
मंत्रिमंडल विस्तार में जिन विधायकों के नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं, उनमें खजान दास, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, विनोद कंडारी, भरत चौधरी, बंशीधर भगत और राम सिंह कैड़ा शामिल हैं। हरिद्वार जिले से प्रदीप बत्रा का नाम सबसे प्रबल माना जा रहा है।
सीएम धामी ने संकेत दिए हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार पर विचार चल रहा है, हालांकि अंतिम फैसला भाजपा हाईकमान ही लेगा। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री जल्द ही दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा कर सकते हैं।
2027 की चुनावी रणनीति से जुड़ा विस्तार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार सीधे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा है। नए चेहरों को मौका देकर भाजपा युवाओं और क्षेत्रीय संतुलन साधना चाहती है। वहीं, मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की भी पूरी संभावना है।
फिलहाल, सबकी निगाहें भाजपा हाईकमान और मुख्यमंत्री धामी के अगले कदम पर टिकी हैं।
