,

प्लैटिनमआरएक्स ने 10 लाख उपयोक्‍ताओं का आंकड़ा पार किया, दवाओं पर 128 करोड़ रुपये से अधिक की बचत

By: Naveen Joshi

On: Friday, May 29, 2026 8:07 PM

Google News
Follow Us
------

 

देहरादून, : किफायती ब्रांडेड-जनरिक दवाओं के लिए भारत के सबसे विश्वसनीय प्लेटफॉर्म प्लैटिनमआरएक्स, ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह प्‍लेटफॉर्म अब तक देश भर में 10 लाख से अधिक मरीजों को अपनी सेवाएँ दे चुका है और इसने अपने उपयोगकर्ताओं को गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक विकल्पों के माध्यम से 128 करोड़ रुपये से अधिक की बचत कराई है।

 

भारत में लाखों लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से जूझ रहे हैं। इनके लिए हर महीने 2,000 से 5,000 रुपये तक दवाओं पर खर्च होना आम बात है। यह खर्च धीरे-धीरे एक बड़ा बोझ बन जाता है। इसी वजह से कई लोग दवा की खुराक छोड़ देते हैं, या कभी-कभी बिना दवा के भी रह जाते हैं। प्लैटिनमआरएक्स को इसी समस्या का समाधान देने के लिए बनाया गया है।

 

यह प्लेटफॉर्म हर दवा के लिए एक सावधानी से चुना गया, उच्च गुणवत्ता वाला ब्रांडेड जेनेरिक विकल्प उपलब्ध कराता है। ये दवाएँ प्रतिष्ठित दवा कंपनियों से सीधे ली जाती हैं और इनमें वास्‍तविक ब्रांडेड दवाओं के समान ही सॉल्ट मिश्रण‍ होता है। सभी दवाएँ लाइसेंस प्राप्त फार्मासिस्ट द्वारा दी जाती हैं और इन्हें पूरे भारत के 20,000 से अधिक पिन कोड्स पर डिलीवर किया जाता है। महानगरों में एक दिन के भीतर और अन्य स्थानों पर 1 से 3 दिन में डिलीवरी हो जाती है। प्लैटिनमआरएक्स के जरिए मरीज बिना गुणवत्ता या सुरक्षा से समझौता किए अपने मासिक दवा खर्च में 50–60% तक की बचत कर रहे हैं।

 

प्लैटिनमआरएक्स के को-फाउंडर आशुतोष पांडे ने कहा, “भारतीय मरीजों के बचे 128 करोड़ रुपये कोई व्‍यावसाय का आंकड़ा नहीं है। यह 128 करोड़ रुपये सीधे आम परिवारों के बजट में बच रहे हैं और इनका इस्‍तेमाल बच्चों की स्कूल फीस, घर का राशन और रोजमर्रा की जिंदगी के उन जरूरी खर्चों के लिए हो रहा है, जो अक्सर महंगी दवाइयों के बिलों के नीचे दब जाते थे। हमने एक बहुत ही सरल सोच के साथ शुरुआत की थी कि अच्छी और बढ़िया दवाइयाँ कोई लग्जरी की चीज नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सबका हक है। लगभग 10 लाख परिवारों से जुड़ने के बाद, हमारा यह भरोसा अब एक बड़ा आंदोलन बनता जा रहा है।'”

 

 

प्लैटिनमआरएक्स की स्थापना आशुतोष पांडे (आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र) और पीयूष कुमार (आईआईएम कोलकाता के पूर्व छात्र) ने की थी। दोनों का दृढ़ विश्वास था कि भारतीय स्वास्थ्य सेवा में वहनीयता की समस्या सप्लाई की नहीं, बल्कि विश्वास और पहुंच की है। पिछले कुछ वर्षों में ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं को अपनाने में लगभग दोगुना वृद्धि हुई है — यह 2024 में 22% से बढ़कर 2025 में 40% हो गया है और 2026 के अंत तक 70% से अधिक होने की उम्मीद है। डेटा साफ दिखाता है कि विश्वास एक-एक प्रिस्क्रिप्शन के साथ कमाया जा रहा है। औसतन, पुरानी बीमारियों वाले मरीज अपनी दवाइयों पर हर महीने 1,500* रुपये तक की बचत कर रहे हैं।

Static 1 Static 1

Naveen Joshi

For Feedback - feedback@example.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

Leave a Comment