मेघालय सरकार ने एशियन वन जापान के साथ ऐतिहासिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए – युवाओं के लिए वैश्विक कौशल और रोज़गार के अवसर खुलेंगे

By: Naveen Joshi

On: Monday, September 8, 2025 8:48 PM

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देहरादून-  मेघालय सरकार ने मेघालय स्टेट स्किल डेवलपमेंट सोसायटी (MSSDS) के माध्यम से टोक्यो, जापान में एशियन वन कंपनी लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण अनुबंध (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह पहल माननीय मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के संगमा की अप्रैल 2025 की जापान यात्रा का परिणाम है। अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय करियर के रास्ते खोलने और उन्हें वैश्विक स्तर पर उपयोगी कौशल देने की दूरदर्शी सोच प्रस्तुत की थी। इसी सोच के आधार पर हुई चर्चाएँ इस अनुबंध तक पहुँची हैं।

 

 

यह साझेदारी मुख्य रूप से स्वास्थ्य सेवाओं, देखभाल (केयरगिविंग), आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी), सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और अन्य ऐसे क्षेत्रों पर केंद्रित होगी, जहाँ जापान को कामकाज के लिए लोगों की आवश्यकता है। इसके साथ ही युवाओं को जापानी भाषा और संस्कृति की ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि वे वहाँ आसानी से घुल-मिल सकें। इस पहल के तहत पहले साल में 500 युवाओं को प्रशिक्षित कर विदेश भेजा जाएगा और अगले पाँच वर्षों में यह संख्या बढ़ाकर 5,000 तक की जाएगी।

 

 

टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में आयोजित कार्यक्रम में माननीय श्रम, रोज़गार और कौशल विकास मंत्री, श्री शाकलियार वारजरी ने कहा, “यह अनुबंध केवल एक कागज़ी दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि हमारे युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय करियर तक पहुँचने का दरवाज़ा है। इसके ज़रिए मेघालय और जापान के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध और भी मज़बूत होंगे।”

 

 

एशियन वन जापान के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, श्री तोशिआकी निशिकावा, भारत और जापान के बीच कामकाजी अवसरों के आदान–प्रदान को बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। हाल ही में श्री निशिकावा ने 29–30 अगस्त 2025 को टोक्यो में हुए 15वें भारत–जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात की थी। यह पहल माननीय प्रधानमंत्री की भारत को “ग्लोबल स्किल हब” बनाने की दृष्टि के अनुरूप है।

 

 

यह ऐतिहासिक अनुबंध मेघालय सरकार और एशियन वन जापान की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके ज़रिए युवाओं के लिए वैश्विक रोज़गार के ठोस और टिकाऊ रास्ते बनेंगे। साथ ही, यह भारत और जापान के बीच कौशल विकास और कामकाज की साझेदारी को भी और गहरा करेगा।

 

 

 

 

 

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