देहरादून, मां ज्वाल्पा देवी कीर्तन मंडली द्वारा शिव रघुनाथ मंदिर, क्लेमनटाउन में आयोजित नौ दिवसीय देवी भागवत कथा एवं आशीर्वाद कवच महायज्ञ के दूसरे दिन व्यासपीठ से नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने शक्ति और पुरुषार्थ के गूढ़ तत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि शक्ति के माध्यम से ही मनुष्य पहले धर्म की प्राप्ति करता है, तत्पश्चात अर्थ की सिद्धि कर पुण्य संचय करते हुए कामनाओं की पूर्ति करता है और अंततः उसी शक्ति के समुचित प्रयोग, त्याग एवं ज्ञान के द्वारा मोक्ष को प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि अपनी शक्ति के प्रवाह का सही दिशा में उपयोग करना ही सच्चा पुरुषार्थ है। शक्ति-संपन्नता को स्वार्थसिद्धि के बजाय लोकहित में लगाते रहना ही उन्नति के पथ पर अग्रसर होने का मार्ग है।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि यदि जीवन में सद्गुणों और सद्भावों का अभाव भी हो, तो शक्ति के सदुपयोग से हर प्रकार के अभाव को दूर कर तुच्छ स्थिति से महानता प्राप्त की जा सकती है। देह, प्राण, इंद्रियां, मन और बुद्धि के माध्यम से होने वाले शक्ति के दुरुपयोग को सदुपयोग में परिवर्तित करने के लिए पूजा-पाठ, कीर्तन, जप, तप और ध्यान जैसे साधनों का आश्रय आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि जिस प्रकार भौतिक शरीर भूलोक के द्रव्यों से निर्मित है, उसी प्रकार प्राणमय, मनोमय और विज्ञानमय क्षेत्र सूक्ष्म एवं अतिसूक्ष्म लोकों से बने हुए हैं। प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट शक्ति होती है और उसी दिव्य शक्ति के आधार पर वह क्षेत्र क्रियाशील रहता है। जिस क्षेत्र में क्रिया की प्रधानता होती है, वही क्षेत्र विशेष रूप से शक्ति-संपन्न होता है।
कथा के दौरान आचार्य दामोदर नौडियाल, साध्वी मां देवेश्वरी, संतोष विष्ट, रविंद्र विष्ट, जगमोहन रावत, मीना रावत, करन नेगी, दमयंती जुयाल, अनीता जदली, नरेंद्र कोटनाला सहित बड़ी संख्या में सनातनी श्रद्धालु उपस्थित रहे।
