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उत्तराखंड

डीएम ने चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र का किया स्थलीय निरीक्षण

 

देहरादून ,ऋषिकेश स्थित चन्द्रेश्वर नाले से बिना उपचारित गंदे पानी एवं ठोस कचरे के गंगा नदी में प्रवाहित होने की प्राप्त शिकायतों को जिलाधिकारी  सविन बंसल ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी ने  चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति का गहन जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गंगा की स्वच्छता एवं पवित्रता से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा। गंगा में मिलने वाले सभी नालों का जल पूर्णतः शोधन के उपरांत ही प्रवाहित होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि चाहे 07 विभागों के वरिष्ठतम प्रतिष्ठान हों या आवासीय भवन—यदि किसी ने गंदा पानी गंगा में बहाया, तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

जिलाधिकारी ने नाले में सीधे दूषित जल प्रवाहित कर रहे 25 घरों के पाइप-ड्रेन्स को तत्काल सीज करने के निर्देश नगर आयुक्त एवं जल संस्थान को दिए। साथ ही गली-मोहल्लों में पैदल निरीक्षण करते हुए नालियों को तीन दिवस के भीतर सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने के निर्देश भी जारी किए।

निरीक्षण के दौरान अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग एवं महाप्रबंधक, निर्माण वृत्त (गंगा), उत्तराखंड पेयजल निगम द्वारा नाले का संपूर्ण नक्शा एवं प्रस्तावित कार्ययोजना जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई। डीएम ने चन्द्रेश्वर नाले की सफाई, शोधन एवं एसटीपी क्षमता वृद्धि को लेकर विस्तृत रिपोर्ट एवं ठोस कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि नगर क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर सीवरेज नेटवर्क उपलब्ध है, किंतु जहां कनेक्शन शेष हैं अथवा कार्य प्रगति पर है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। बिना उपचारित जल प्रवाहित करने वाले प्रतिष्ठानों एवं आवासीय भवनों के विरुद्ध कठोर प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सीवरेज अनुरक्षण इकाई द्वारा अवगत कराया गया कि ऋषिकेश में 7.50 एमएलडी क्षमता का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत ढालवाला-मुनिकीरेती योजना में निर्मित है, जो देश का अपनी तरह का पहला बहुमंजिला एसटीपी है। यह अक्टूबर 2020 से अनुरक्षणाधीन है तथा तीन प्रमुख नालों—श्मशान घाट नाला, चन्द्रेश्वर नगर नाला एवं ढालवाला नाले के शोधन हेतु कार्यरत है।

अधिकारियों ने बताया कि मानसून काल में ढालवाला नाले में प्रवाह एसटीपी क्षमता से अधिक हो जाता है, किंतु जल गुणवत्ता परीक्षण में प्रदूषण स्तर न्यून पाया गया है। नाले के दोनों ओर ड्रोन सर्वे एवं परिवार सर्वेक्षण किया जा रहा है, जिसमें प्रारंभिक रूप से 502 परिवार चिन्हित किए गए हैं। सीधे प्रवाहित हो रहे जल के नमूनों की जांच एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला से कराई जा रही है।

जिलाधिकारी ने नगर निगम, उपजिलाधिकारी, पेयजल निगम, जल संस्थान, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अन्य संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए समेकित रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट जनहित में सार्वजनिक की जाएगी, जिससे गंगा संरक्षण को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहरा, नगर आयुक्त राम कुमार बिनवाल, सीओ पुलिस पूर्णिमा गर्ग सहित सिंचाई विभाग, जल निगम, जल संस्थान एवं सीवरेज अनुरक्षण इकाई के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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