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उत्तराखंड

न्यायालय परिसरों की सुरक्षा होगी और कड़ी, पुलिस मुख्यालय ने जारी किए अतिरिक्त दिशा-निर्देश

देहरादून। उत्तराखण्ड पुलिस मुख्यालय द्वारा प्रदेश के समस्त जनपदों को माननीय न्यायाधीशों, माननीय न्यायालयों एवं न्यायालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराते हुए चिन्हित कमियों के त्वरित निराकरण के निर्देश पूर्व में जारी किए गए थे।
इसी क्रम में न्यायालय परिसरों की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ एवं अभेद्य बनाने के उद्देश्य से अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी करते हुए उनका अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जारी प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं—
▪️ प्रदेश के सभी जनपदों में स्थित न्यायालय परिसरों में पर्याप्त संख्या में पुलिस एवं पीएसी बल को आवश्यक सुरक्षा उपकरणों सहित तैनात किया जाए।
▪️ न्यायालयों के प्रवेश एवं निकासी द्वारों पर संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर पहचान पत्र के माध्यम से प्रवेश-निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई अनाधिकृत व्यक्ति परिसर में प्रवेश न कर सके।
▪️ न्यायालय परिसरों में बैरियर लगाकर एक्सेस कंट्रोल की प्रभावी व्यवस्था की जाए तथा प्रवेश द्वारों पर आने-जाने वाले व्यक्तियों की सघन स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाए। इसके लिए स्थानीय अभिसूचना इकाई सहित अन्य पुलिस बल की तैनाती की जाए।
▪️ न्यायाधीशों एवं न्यायालयों की सुरक्षा में पूर्व से नियुक्त सुरक्षा कर्मियों को वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य के मद्देनज़र अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए जाएं।
▪️ संभावित आतंकवादी घटनाओं एवं बम हमलों की आशंका के दृष्टिगत जनपदों में क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) तथा यथासंभव एटीएस की टीमों की भी न्यायालय परिसरों में तैनाती सुनिश्चित की जाए।
▪️ न्यायालयों की कार्यवाही प्रारंभ होने से पूर्व प्रतिदिन प्रातःकाल बम निरोधक दस्ते एवं डॉग स्क्वॉड के माध्यम से एंटी-सैबोटाज चेकिंग कराई जाए।
▪️ न्यायालय परिसरों में स्थापित सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निरंतर मॉनिटरिंग की जाए और नियंत्रण कक्ष से इसकी प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
▪️ न्यायालय परिसरों में नियमित गश्त (पैट्रोलिंग) की व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।
▪️ ड्यूटी पर तैनात कार्मिकों की नियमित रूप से चेकिंग एवं ब्रीफिंग सुनिश्चित की जाए।
▪️ संभावित सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित कर आपातकालीन निकास योजना का परीक्षण एवं अद्यतन किया जाए।
पुलिस मुख्यालय ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए समय-समय पर समीक्षा भी की जाए, जिससे न्यायालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पूर्णतः चाक-चौबंद और अभेद्य बनी रहे।

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