यूरोप के शीर्ष विश्वविद्यालयों में अध्ययन का अवसर, कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से भी मिले आकर्षक प्रस्ताव
देहरादून, शैक्षणिक उत्कृष्टता का उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए डीआईटी विश्वविद्यालय, देहरादून की बी.एससी. भौतिकी की छात्रा सुश्री श्रिया सुब्रमण्यम ने प्रतिष्ठित इरास्मस मुंडस संयुक्त परास्नातक कार्यक्रम में प्रवेश प्राप्त किया है। उन्हें “हरित एवं डिजिटल परिवर्तन हेतु नैनो पदार्थों में परास्नातक (ग्रीनैनो)” कार्यक्रम के लिए शैक्षणिक सत्र 2026–2028 में चयनित किया गया है।
यह कार्यक्रम विश्व के सबसे प्रतिस्पर्धी और प्रतिष्ठित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शामिल है, जिसमें विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से उन्नत एवं बहु-विषयक शिक्षा प्रदान की जाती है। इस दौरान श्रिया को फ्रांस, इटली और स्लोवेनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों में अध्ययन का अवसर मिलेगा।
इस उपलब्धि को और विशेष बनाते हुए, श्रिया को इरास्मस मुंडस की पूर्ण छात्रवृत्ति भी प्राप्त हुई है। यह छात्रवृत्ति 24 माह के पूरे पाठ्यक्रम की फीस, यात्रा और रहने का खर्च वहन करेगी।
इसके अलावा, श्रिया को यूरोप के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से भी प्रवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें फिनलैंड के आल्टो विश्वविद्यालय में 100% उत्कृष्टता छात्रवृत्ति के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं नैनोप्रौद्योगिकी, बेल्जियम के केयू ल्यूवेन में नैनोविज्ञान एवं नैनोप्रौद्योगिकी, स्वीडन के केटीएच रॉयल प्रौद्योगिकी संस्थान में नैनोप्रौद्योगिकी तथा फिनलैंड के तुर्कु विश्वविद्यालय में पदार्थ अभियांत्रिकी जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ श्रिया ने सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने विद्यार्थी नवाचार दूत के रूप में नेतृत्व क्षमता और नवाचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है।
अपनी सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए श्रिया ने डीआईटी विश्वविद्यालय को सहयोगात्मक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने विशेष रूप से भौतिकी विभाग की पदार्थ एवं नैनो अनुसंधान प्रयोगशाला का आभार व्यक्त किया, जहां उन्हें व्यावहारिक शोध का अनुभव मिला। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत संचालित चार वर्षीय बी.एससी. (अनुसंधान) कार्यक्रम को भी अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया।
श्रिया सुब्रमण्यम की यह उपलब्धि न केवल अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि डीआईटी विश्वविद्यालय की बढ़ती शैक्षणिक प्रतिष्ठा और वैश्विक पहचान को भी मजबूत करती है।





