देहरादून, Ministry of Culture और Heartfulness के संयुक्त तत्वावधान में Guru Tegh Bahadur जी के 350वें शहीदी वर्ष तथा Pujya Babuji Maharaj की 127वीं जयंती के उपलक्ष्य में 29 अप्रैल से 1 मई तक Kanha Shanti Vanam में भव्य आयोजन किया जा रहा है।
इस अवसर पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति Ram Nath Kovind, उत्तराखंड के राज्यपाल Gurmeet Singh तथा संस्कृति मंत्रालय के सचिव Vivek Aggarwal सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे। इनके साथ मेजर सुनील दत्त द्विवेदी (विधायक, फतेहगढ़), अर्पित दुबे एवं ईश्वर आचार्य (संयुक्त सचिव, Morarji Desai National Institute of Yoga), काशीनाथ समगड़ी (निदेशक) तथा गुरलाद सिंह कहलोन (समाजसेवी एवं पूर्व सदस्य, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति) भी कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।
कार्यक्रम में राष्ट्रसंत Tukdoji Maharaj से प्रेरित राष्ट्रसंत समुदाय का विशेष स्वागत किया जाएगा। उनका संदेश—“ईश्वर भक्ति को मानव सेवा में बदलो”—आज भी समाज को सेवा और समर्पण के मार्ग पर प्रेरित करता है।
इस आयोजन के अंतर्गत डॉ. अलंकार सिंह द्वारा शबद कीर्तन प्रस्तुत किया जाएगा। इसके पश्चात गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और शिक्षाओं पर व्याख्यान, प्रदर्शनी एवं फिल्म प्रदर्शन आयोजित होंगे। कार्यक्रम का समापन समूह ध्यान सत्र के साथ होगा, जिसका संचालन पूज्य दाजी, हार्टफुलनेस के मार्गदर्शक एवं Shri Ram Chandra Mission के अध्यक्ष द्वारा किया जाएगा।
इस आयोजन का उद्देश्य विभिन्न धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाकर गुरु तेग बहादुर जी और बाबूजी महाराज के सत्य, आध्यात्मिकता और सार्वभौमिक चेतना के संदेशों का प्रसार करना है। साथ ही, यह राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की सेवा और एकता की भावना को भी सुदृढ़ करता है।
गुरु तेग बहादुर जी, जिन्हें “हिंद दी चादर” के नाम से भी जाना जाता है, ने मानव अधिकारों की रक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका संदेश—न किसी से डरना, न किसी को डराना—आज भी प्रासंगिक है। वहीं, बाबूजी महाराज ने गुरु भक्ति, सत्संग और नियमित साधना के माध्यम से आत्मिक उन्नति का मार्ग दिखाया।
आयोजन के दौरान आयोजित भंडारे में 20,000 से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। बाबूजी महाराज की जयंती का यह वार्षिक उत्सव देश-विदेश के हजारों लोगों को आकर्षित करता है, जिनमें बड़ी संख्या में प्रतिभागी वर्चुअल माध्यम से भी जुड़ते हैं।





