चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )
भगवान बद्रीविशाल के धाम से एक ऐसी भावुक और चमत्कारी कहानी सामने आई है, जिसने कानून के सख्त चेहरों के पीछे छिपी इंसानियत और मुस्तैदी की एक नई मिसाल पेश की है। मामला तब शुरू हुआ जब बद्रीनाथ पुलिस धाम में ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत एक वृहद सत्यापन अभियान चला रही थी। इसी दौरान पुलिस की नजर साधु के वेश में घूम रहे एक युवक पर पड़ी। जब पुलिस ने उससे पूछताछ की, तो वह हिंदी का एक शब्द भी नहीं बोल पा रहा था। शक गहराने पर जब गहनता से जांच की गई तो पता चला कि युवक तमिल भाषी है। अब सबसे बड़ी चुनौती थी भाषा की दीवार! ऐसे में भाषा की बाधा को पार करने में एक बार फिर तकनीक मददगार साबित हुई। आरक्षी चन्दन सिंह नगरकोटी ने गूगल ट्रांसलेटर की सहायता से युवक से संवाद स्थापित किया और अपने स्तर से जानकारी जुटाते हुए पता लगाया कि युवक तमिलनाडु के जिला मदुरै स्थित असिनपट्टी पुलिस स्टेशन क्षेत्र का निवासी है। इसके बाद आरक्षी चन्दन सिंह नगरकोटी ने अथक प्रयास और लगातार खोजबीन करते हुए असिनपट्टी पुलिस स्टेशन में तैनात हेड कांस्टेबल सेंथिल कुमार से संपर्क स्थापित किया।
वहां से जो जानकारी मिली, उसने सबके होश उड़ा दिए। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि इस युवक का नाम सतीश है, जो मार्च 2026 से रहस्यमयी ढंग से लापता था और परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करा रखी थी। जैसे ही तमिलनाडु में सतीश के परिजनों को सूचना मिली कि उनका बेटा बद्रीनाथ धाम में सुरक्षित है, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बिना एक पल गंवाए परिजन हवाई जहाज से देहरादून पहुंचे और वहां से पहाड़ों के दुर्गम रास्तों को पार करते हुए कार से सीधे बद्रीनाथ जी धाम पहुंचे।
बद्रीनाथ कोतवाली में जब महीनों बाद माता-पिता और बेटे का सामना हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। सतीश अपने परिवार को देखते ही खुद को रोक नहीं पाया और उनके गले लगकर फूट-फूटकर रो पड़ा। महीनों का दर्द आंसुओं के जरिए बह निकला।
वैधानिक कार्यवाही पूरी करने के बाद जब पुलिस ने सतीश को उसके परिजनों के सुपुर्द किया, तो भावुक माता-पिता ने उत्तराखंड पुलिस का हाथ जोड़कर आभार जताया और कहा “ हमारा तो साक्षात भगवान नारायण से साक्षात्कार हो गया है। बद्रीनाथ पुलिस ने हमें हमारा खोया हुआ संसार लौटा दिया।”
इस पूरे रेस्क्यू और महामिलन ने देश के दो छोरों (उत्तराखंड और तमिलनाडु) को आपस में जोड़ दिया। इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी और भावुक बात यह रही कि चंदन नगरकोटी लगातार सतीश के परिजनों के संपर्क में रहे। तमिलनाडु से उत्तराखंड की इस लंबी और अनजान राह पर चल रहे परेशान परिजनों का वह लगातार मार्गदर्शन करते रहे और उन्हें ढाँढस बँधाते रहे।





