चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )
गोपेश्वर महाविद्यालय में इतिहास विभाग में प्राध्यापक डॉ शिवचंद सिंह रावत के पुस्तक प्रकाशन पर प्राचार्य एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकों द्वारा खुशी व्यक्त की गई।
पुस्तक ” गोपेश्वर तथा रुद्रनाथ का ऐतिहासिक अध्ययन एवं धार्मिक महत्व” उत्तराखंड के पंच केदारों में से एक चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ जी तथा रुद्रनाथ जी के शीतकालीन गद्दी स्थल गोपेश्वर के इतिहास और धार्मिक महत्त्व को उजागर करती है। पुस्तक ‘समय साक्ष्य’ देहरादून द्वारा प्रकाशित की गई है।
यह पुस्तक गोपेश्वर तथा रुद्रनाथ के इतिहास तथा धार्मिक महत्त्व पर आधारित है।पुस्तक में चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर, इसके महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल जैसे सरस्वती कुण्ड,नारद कुण्ड, वैतरणी कुण्ड, सूर्य कुण्ड, ज्योतिर्लिंग,भीम की गदा,रुद्रनाथ यात्रा मार्ग की जानकारी के प्रदान करती है।
साथ ही इसके महत्वपूर्ण पड़ाव,पुंग,मोल़ी खर्क,ल्वींटी,पनार बुग्याल,रुद्रनाथ मंदिर का इतिहास,मंदिर निर्माण,रुद्रनाथ यात्रा का मनोहारी वर्णन,गोपेश्वर स्थित रुद्रनाथ मंदिर, इसका इतिहास, गोपेश्वर नगर की स्थापना की महत्वपूर्ण सूचना साझा करती है।
पुस्तक में गोपेश्वर नगर स्थित महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल जैसे वैतरणी, चामुंडा मंदिर, चण्डिका मंदिर, प्राचीन कुँआ, वाराही देवता, जाख देवता, हनुमान मंदिर, माता मंदिर, गणेश मंदिर, नवदुर्गा मंदिर, दमौ पावे (पवन देवता), अग्नि देव मंदिर तथा पर्यटन आदि पर प्रकाश डाला गया है।
प्राचार्य प्रो एमपी नगवाल द्वारा पुस्तक प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की। यह पुस्तक गोपेश्वर तथा रुद्रनाथ के बारे में जानकारी चाहने वाले जिज्ञासु श्रद्धालुओं, पुस्तक प्रेमी पाठकों, गोपेश्वर के बारे रुचि रखने और पढ़ने के इच्छुक महानुभावों, विद्यार्थियों आदि के लिए उपयोगी होगी।

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