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वैश्विक चुनाव प्रेक्षकों की भूमिका पर देहरादून में मंथन, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव व्यवस्था पर दिया गया जोर

By: Naveen Joshi

On: Friday, July 24, 2026 6:42 PM

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20 से अधिक देशों व विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों की सहभागिता, चुनावों में जनविश्वास बनाए रखने को बताया प्रेक्षकों का सबसे बड़ा दायित्व

देहरादून। लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय उत्तराखंड की ओर से  ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में “मॉडल स्टैंडर्ड्स फॉर इलेक्टोरल ऑब्जर्वर” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में अमेरिका, रोमानिया, आयरलैंड, इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, हंगरी और नेपाल सहित विभिन्न देशों के चुनाव प्रबंधन विशेषज्ञों के साथ 20 से अधिक विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों एवं 400 से अधिक प्रतिभागियों ने हाइब्रिड माध्यम से भाग लिया।

मुख्य अतिथि मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने कहा कि भारत, इंटरनेशनल आईडिया की अध्यक्षता के दौरान वैश्विक स्तर पर चुनाव प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए ज्ञान और अनुभवों के आदान-प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रेक्षकों की जिम्मेदारी केवल चुनाव प्रक्रिया की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, निष्पक्षता और लोकतंत्र के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करना भी उनका प्रमुख दायित्व है।

भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भारती ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव प्रेक्षकों की निष्पक्ष एवं सक्रिय भूमिका से चुनावी मशीनरी अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और प्रभावी बनती है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का चुनाव प्रक्रिया पर अटूट विश्वास है और इसे हर परिस्थिति में बनाए रखना प्रत्येक प्रेक्षक का सर्वोच्च दायित्व है।

ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. तवस्सुम नकवी ने स्वागत भाषण में निर्वाचन आयोग द्वारा आधुनिक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करने और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से चुनाव प्रबंधन को मजबूत बनाने की पहल को सराहनीय बताया।

तकनीकी सत्र में सीजीएसटी देहरादून के अपर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता ने चुनाव व्यय प्रेक्षकों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि डिजिटल और सोशल मीडिया पर चुनावी प्रचार की प्रभावी निगरानी भविष्य की बड़ी आवश्यकता है। वहीं स्टेट पुलिस ट्रेनिंग नोडल आईजी अनंत शंकर ताकवले ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों के उपयोग से चुनाव प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाया जा सकता है।

विशेष परिचर्चा सत्र में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने विभिन्न देशों की चुनावी व्यवस्थाओं में प्रेक्षकों की भूमिका पर विस्तृत प्रस्तुति दी, जबकि हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने में फील्ड प्रशासन की भूमिका को रेखांकित किया।

सम्मेलन के तीसरे सत्र में IIIDEM की डॉ. कृतिका माथुर, आईआईएम काशीपुर के प्रो. दिलीप कुमार, उत्तरांचल विश्वविद्यालय के प्रो. राधेश्याम झा, दून विश्वविद्यालय के प्रो. हर्ष डोभाल तथा ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय की प्रो. डेजी एलेक्जेंडर ने चुनाव प्रबंधन और प्रेक्षक प्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र दुम्का, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित विभिन्न संस्थानों के शिक्षाविद, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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