Advertisement

यूकॉस्ट की अभिनव पहल ‘विज्ञान वाणी-88.8 MHz’ बनी विज्ञान और नवाचार के जनसंचार का सशक्त माध्यम

By: Naveen Joshi

On: Friday, July 31, 2026 1:26 PM

Google News
Follow Us

 

देहरादून। विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की पहल ‘विज्ञान सेतु’ राज्य में विज्ञान संचार का प्रभावी मंच बनकर उभर रही है। इस पहल के अंतर्गत स्थापित ‘विज्ञान वाणी’ (88.8 मेगाहर्ट्ज़) सामुदायिक विज्ञान रेडियो स्टेशन, ‘विज्ञान धारा’ स्टूडियो तथा ‘विज्ञान दृश्यम्’ पॉडकास्ट स्टूडियो विज्ञान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं।

यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि वर्तमान समय विज्ञान और प्रौद्योगिकी का युग है। स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, पर्यावरण, ऊर्जा, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन और संचार सहित जीवन का प्रत्येक क्षेत्र विज्ञान से जुड़ा हुआ है। ऐसे में विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों तक सीमित न रहकर आम नागरिकों तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच और जिज्ञासा किसी भी प्रगतिशील समाज की आधारशिला हैं तथा विज्ञान संचार विज्ञान और समाज के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करता है।

उन्होंने बताया कि डिजिटल युग में जहाँ सूचनाओं का तेजी से प्रसार हो रहा है, वहीं भ्रामक जानकारियाँ और अफवाहें भी समाज को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में विज्ञान संचार की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। यह लोगों को प्रमाण-आधारित जानकारी उपलब्ध कराने, वैज्ञानिक तथ्यों को सरल भाषा में समझाने तथा सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में सहायक है। विशेष रूप से कृषि, जल संरक्षण, जैव विविधता, स्वास्थ्य, पोषण, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर वैज्ञानिक जानकारी ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।

प्रो. पंत ने बताया कि 13 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी एवं सुराज मंत्री प्रदीप बत्रा की उपस्थिति में ‘विज्ञान वाणी’ रेडियो स्टेशन और उसके मोबाइल एप्लीकेशन का शुभारंभ किया। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा यूकॉस्ट को 88.8 मेगाहर्ट्ज़ की आवृत्ति प्रदान की गई है। अब रेडियो प्रसारण के साथ-साथ मोबाइल एप के माध्यम से देश-विदेश में कहीं से भी विज्ञान वाणी को सुना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रेडियो आज भी सबसे विश्वसनीय और प्रभावी संचार माध्यम है। स्थानीय भाषा और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विज्ञान आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से विज्ञान वाणी वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के बीच संवाद का सशक्त मंच बन रही है। इसमें विज्ञान समाचार, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन, अंतरिक्ष विज्ञान, स्टार्टअप, नवाचार और स्थानीय वैज्ञानिक गतिविधियों पर नियमित कार्यक्रम प्रसारित किए जा रहे हैं।

विज्ञान वाणी के प्रभारी अमित पोखरियाल ने बताया कि श्रोताओं के लिए “ऐसा क्यों होता है?”, “वैज्ञानिक से परिचय”, “भारतीय ज्ञान धारा”, “प्रकृति संवाद”, “विज्ञान काव्य”, “विशेषज्ञ से बातचीत”, “आइए स्वयं करें प्रयोग”, “विज्ञान समाचार”, “विज्ञान पुस्तक चर्चा” तथा “प्रेरणादायी महिला वैज्ञानिक” जैसे अनेक लोकप्रिय कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। इनका उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और प्रश्न पूछने की संस्कृति विकसित करना है।

उन्होंने बताया कि ‘विज्ञान धारा’ स्टूडियो के माध्यम से विशेषज्ञ व्याख्यान, वेबिनार, कार्यशालाएँ और कौशल विकास प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि ‘विज्ञान दृश्यम्’ पॉडकास्ट स्टूडियो में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और उद्योग विशेषज्ञों के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े विषयों पर संवाद रिकॉर्ड कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों और युवाओं को भी गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक जानकारी और प्रशिक्षण का लाभ मिल रहा है।

यूकॉस्ट का मानना है कि ‘विज्ञान सेतु’ केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि विज्ञान को समाज से जोड़ने का व्यापक जन-अभियान है। विज्ञान वाणी, विज्ञान धारा और विज्ञान दृश्यम् जैसे मंचों के माध्यम से विज्ञान को सरल, सुलभ और सहभागितापूर्ण बनाया जा रहा है। यह पहल युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा उत्तराखण्ड को विज्ञान आधारित ज्ञान समाज के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

विज्ञान वाणी 88.8 MHz का मोबाइल एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है, जिसके माध्यम से देश-विदेश में कहीं से भी विज्ञान आधारित कार्यक्रम सुने जा सकते हैं।

For Feedback - feedback@example.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment