देहरादून। गांधी रोड स्थित जैन भवन आध्यात्मिक आस्था, श्रद्धा और धर्ममय वातावरण से सराबोर रहा। पूज्य आर्यिका 105 श्री पूर्णमति माताजी के पावन सान्निध्य में चातुर्मास वर्षायोग के अंतर्गत मंगल कलश स्थापना से पूर्व मंगल कलश शुद्धि कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, भक्ति और जिनेंद्र आराधना की पावन ध्वनि गूंजती रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान जिनेंद्र के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। इसके उपरांत परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज की भक्तिभाव से पूजन संपन्न हुई, जिसका सौभाग्य महिला जैन मिलन को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्ति और समर्पण के साथ धर्म आराधना में सहभागिता कर आध्यात्मिक पुण्य अर्जित किया।
अपने मंगल प्रवचन में पूज्य आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी ने जैन आगम राजवार्तिक में वर्णित “सागर” काल की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि इसकी विशालता और गहराई मानव कल्पना से भी परे है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से व्यवहार पल्य, उद्धार पल्य, अद्धा पल्य और सागर की अवधारणा को सरल भाषा में समझाते हुए बताया कि जिनेंद्र भगवान की निष्कपट आराधना तथा श्रद्धापूर्वक णमोकार महामंत्र के स्मरण से अनंत काल के संचित पाप भी क्षीण हो जाते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्म, संयम, सदाचार और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
प्रवचन के उपरांत पूज्य माताजी के मंत्रोच्चार एवं वैदिक-विधि के अनुरूप मंगल कलशों की शुद्धि संपन्न कराई गई। विधानाचार्य ने मंगलाष्टक, शुद्धि मंत्र एवं पावन श्लोकों का उच्चारण किया। यजमानों ने संकल्प लेकर कलशों को सुशोभित किया तथा उनमें जल, हल्दी, सुपारी, पीली सरसों और श्रीफल स्थापित कर मंगलमय वातावरण में धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण किया।
मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि 2 अगस्त (रविवार) प्रातः 8:30 बजे भव्य मंगल कलश स्थापना समारोह आयोजित होगा। इस पावन अवसर पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी विशिष्ट अतिथि तथा कैबिनेट मंत्री खजान दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। जैन समाज ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इस पुण्य अवसर पर उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की।









