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देवीधुरा में आस्था का अद्भुत संगम, फलों-फूलों से खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल

By: Naveen Joshi

On: Friday, August 28, 2026 4:44 PM

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देवीधुरा/चम्पावत। देवभूमि उत्तराखंड के चम्पावत जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां वाराही धाम देवीधुरा शुक्रवार को आस्था, अध्यात्म, लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपरा का अद्भुत साक्षी बना। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आयोजित ऐतिहासिक बग्वाल मेले में मां वाराही के जयकारों के बीच चार खाम और सात थोक के बग्वालियों ने पारंपरिक बग्वाल खेलकर अपनी प्राचीन धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया। फल और फूलों की वर्षा के बीच खेले गए इस अनूठे युद्ध के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवीधुरा पहुंचे।
बग्वाल दोपहर 1:48 बजे शुरू होकर 1:55 बजे समाप्त हुई। लगभग आठ मिनट तक चले इस ऐतिहासिक आयोजन में इस बार फल और फूलों का प्रयोग किया गया। बग्वाल मैदान शंखनाद, मां वाराही के जयघोष और श्रद्धालुओं की आस्था से गूंजता रहा।
मां वाराही के दरबार में पहुंचे मुख्यमंत्री
बग्वाल मेले में शामिल होने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा हेलीपैड पहुंचे। हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक छोलिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने देवभूमि की लोक संस्कृति की छटा बिखेर दी।
मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ मां वाराही देवी के दरबार में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना की। उन्होंने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए प्रार्थना की कि मां वाराही मइया की कृपा सभी पर सदैव बनी रहे।
मुख्यमंत्री ने देवीधुरा की पावन भूमि और विश्व प्रसिद्ध बग्वाल को उत्तराखंड की अगाध धार्मिक आस्था, समृद्ध लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
विकास भी और विरासत भी’ का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के अंतर्गत कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। देवीधुरा मंदिर परिसर में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन तथा 4.57 करोड़ रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य प्रगति पर हैं।
इसके अलावा घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट और लधौनधुरा मेला स्थल का सौंदर्यीकरण पूरा किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर 1.95 करोड़ रुपये, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण पर 4.70 करोड़ रुपये तथा पूर्णागिरि मार्ग पर 5 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना के कार्य किए जा रहे हैं। पाताल रुद्रेश्वर, खेतीखान सूर्य मंदिर, भूमिया देव मंदिर, भिगराड़ा मंदिर एवं डुंगरी-फत्याल शिव मंदिर से संबंधित विकास कार्य भी गतिमान हैं। पिछले पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना एवं सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन का उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं को सुविधा देना नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना तथा रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना भी है। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
देवीधुरा बनेगा नगर पंचायत क्षेत्र
मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण शीघ्र कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बग्वाल मेले को ‘राजकीय मेला’ घोषित कर इसकी गरिमा बढ़ाई गई है और श्रद्धालुओं की सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।
चार खामों के प्रवेश के साथ शुरू हुई बग्वाल
मां वाराही धाम में प्रधान पुजारी की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बग्वाल की धार्मिक परंपरा शुरू हुई। इसके बाद चारों खाम—वालिक (सफेद), चम्याल (गुलाबी), गहड़वाल (भगवा) और लमगड़िया (पीला)—के बग्वालियों ने मैदान में प्रवेश किया।
पारंपरिक वेशभूषा और रंग-बिरंगी पगड़ियों से सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और मां वाराही के जयघोष के बीच जैसे ही बग्वाल शुरू हुई, पूरा मैदान आस्था और उत्साह से भर उठा।
इस बार बग्वाल में फल और फूलों का प्रयोग किया गया। देखते ही देखते पूरा मैदान फूलों और फलों की बरसात से सराबोर हो गया। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार, फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है। खामों के आगमन और बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी भी पीठाचार्य कीर्तिबल्लभ जोशी ने निभाई।
बग्वाल के बाद गले मिलते हैं ‘योद्धा’
मुख्यमंत्री ने बग्वाल का अवलोकन करते हुए कहा कि मां वाराही मइया सबकी चिंता करती हैं। देवीधुरा की यह अनूठी विरासत विश्व में अद्वितीय है और यहां की परंपरा अनुशासन, भाईचारे और सामुदायिक एकता की मिसाल है। बग्वाल के बाद सभी ‘योद्धाओं’ का गले मिलना इस परंपरा के मूल संदेश—आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे—को साकार करता है।
रक्षाबंधन के अवसर पर क्षेत्र की बच्चियों एवं महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधकर पर्व की खुशियां साझा कीं।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, मां वाराही मंदिर समिति अध्यक्ष हीराबल्लभ जोशी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविन्द सामन्त, मुख्य विकास अधिकारी जीएस खाती, परियोजना निदेशक अजय सिंह, सीएमओ देवेश चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, मंदिर समिति के पदाधिकारी, क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
देवीधुरा की बग्वाल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि देवभूमि की धार्मिक परंपराएं केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी आस्था, संस्कृति, एकता और भाईचारे को जीवंत रखने वाली अमूल्य धरोहर हैं।

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