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यूपीईएस में एआई-फर्स्ट शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम, गूगल क्लाउड के साथ सहयोग मजबूत

By: Naveen Joshi

On: Tuesday, September 1, 2026 3:16 PM

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देहरादून,  शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यूपीईएस ने गूगल क्लाउड के साथ अपने रणनीतिक सहयोग को और मजबूत किया है। विश्वविद्यालय परिसर में ‘गूगल जेमिनी डे’ का आयोजन किया गया, साथ ही छात्रों और फैकल्टी के लिए 10,100 जेमिनी एंटरप्राइज फॉर एजुकेशन का रोलआउट किया गया। इस पहल का उद्देश्य शिक्षण-अधिगम, शोध, अकादमिक सहयोग और नवाचार में एआई के उपयोग को व्यापक बनाना है।
कार्यक्रम में गूगल इंडिया, उसके टेक्नोलॉजी डिप्लॉयमेंट पार्टनर पैराडाइमआईटी और यूपीईएस समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें गूगल क्लाउड (इंडिया एंड सार्क) के इंडिया हेड-एडटेक्स एंड एजुकेशन वैभव कुमार श्रीवास्तव, आंचल चोपड़ा, मनोज भूटानी और पैराडाइमआईटी के सीईओ एवं एमडी श्रीधर गाधी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत गूगल प्रतिनिधिमंडल के स्वागत और संवाद के साथ हुई। इसके बाद यूपीईएस के नेतृत्व, छात्रों और फैकल्टी के साथ विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। चर्चा में शिक्षा के क्षेत्र में जनरेटिव एआई की भूमिका, एंटरप्राइज-ग्रेड एआई टूल्स की उपयोगिता और इनके माध्यम से विद्यार्थियों व शिक्षकों को नए प्रयोग, निर्माण और समस्या-समाधान के अवसर उपलब्ध कराने पर विचार किया गया।

जेमिनी के जिम्मेदार उपयोग पर विशेष सत्र
‘गूगल जेमिनी डे’ के दौरान वैभव कुमार श्रीवास्तव ने यूपीईएस के छात्रों के लिए विशेष जेमिनी सत्र आयोजित किया। इसमें संवादात्मक सत्र और प्रश्नोत्तर के साथ जेमिनी एंटरप्राइज के विभिन्न उपयोगों का प्रदर्शन किया गया। छात्रों को अलग-अलग अकादमिक विषयों में एआई का प्रभावी और जिम्मेदार उपयोग करने के तरीकों से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतीकात्मक बैलून रिलीज के साथ ‘गूगल जेमिनी डे’ के औपचारिक उत्सव और यूपीईएस की एआई परिवर्तन यात्रा के अगले चरण की शुरुआत की गई।
यूपीईएस के वाइस चांसलर डॉ. सुनील राय ने कहा कि एआई-फर्स्ट यूनिवर्सिटी बनने का अर्थ केवल विद्यार्थियों को अत्याधुनिक तकनीक तक पहुंच उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि एआई को सीखने, पढ़ाने, शोध और नवाचार की प्रक्रिया का सार्थक हिस्सा बनाना है। जेमिनी एंटरप्राइज फॉर एजुकेशन के माध्यम से छात्रों और फैकल्टी को अपने दैनिक अकादमिक कार्यों में शक्तिशाली एआई क्षमताओं का उपयोग करने का अवसर मिलेगा।
गूगल क्लाउड के इंडिया हेड-एडटेक्स एंड एजुकेशन वैभव कुमार श्रीवास्तव ने यूपीईएस को गूगल क्लाउड पर शुरुआती डिजिटल कैंपसेज में शामिल होने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने एआई की संभावनाओं और विद्यार्थियों के लिए इससे बनने वाले अवसरों को समझने में दूरदृष्टि दिखाई है। उन्होंने कहा कि यूपीईएस भविष्य की वर्कफोर्स के साथ-साथ भविष्य के जॉब क्रिएटर्स तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

एआई-रेडी विद्यार्थियों को तैयार करने पर जोर
जेमिनी एंटरप्राइज की सुविधा मिलने से यूपीईएस के छात्र और फैकल्टी उन्नत एआई क्षमताओं को समझने, एआई आधारित समाधान विकसित करने, अकादमिक एवं शोध उपकरणों के साथ प्रयोग करने और तेजी से बदलती तकनीक की व्यावहारिक समझ विकसित करने में सक्षम होंगे।
विश्वविद्यालय के अनुसार, यह पहल छात्रों को केवल एआई तकनीक के उपयोगकर्ता बनाने के बजाय क्रिएटर, समस्या-समाधानकर्ता और इनोवेटर के रूप में तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उद्योग से जुड़ाव, अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों और अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से यूपीईएस एआई-सक्षम अकादमिक इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है।

शैक्षणिक उपलब्धियों में भी यूपीईएस की मजबूत स्थिति
यूपीईएस की स्थापना उत्तराखंड राज्य विधानमंडल के यूपीईएस अधिनियम, 2003 के तहत हुई है। विश्वविद्यालय के अनुसार, एनआईआरएफ 2025 में इसे विश्वविद्यालय श्रेणी में 45वां स्थान प्राप्त हुआ है। लॉ में 18वां, मैनेजमेंट में 36वां और इंजीनियरिंग में 43वां स्थान मिला है।
टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 में यूपीईएस 501-600 के वैश्विक बैंड में शामिल है और भारत में पांचवें स्थान पर है। विश्वविद्यालय के अनुसार, रिसर्च क्वालिटी में भी उसने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है।
यूपीईएस सात स्कूलों के माध्यम से ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कार्यक्रम संचालित करता है। विश्वविद्यालय में 20,000 से अधिक छात्र, 1,500 से अधिक फैकल्टी एवं स्टाफ सदस्य और 40,000 से अधिक पूर्व छात्र हैं। विश्वविद्यालय का कहना है कि गूगल क्लाउड के साथ यह सहयोग विद्यार्थियों को भविष्य की एआई-आधारित अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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