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शिक्षा के साथ संस्कार और अनुशासन भी जरूरी : धामी

By: Naveen Joshi

On: Tuesday, September 8, 2026 5:17 PM

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देहरादून। मुख्यमंत्री  धामी ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देने का कार्य नहीं करता, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार और दृष्टिकोण को आकार देकर पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक मार्गदर्शन देना भी उतना ही जरूरी है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने सम्मानित शिक्षकों एवं छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह’ महज सम्मान और छात्रवृत्ति वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रतिभाओं को पहचान देने, शिक्षा को प्रोत्साहित करने और विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने का सराहनीय प्रयास है। किसी जरूरतमंद बच्चे की शिक्षा में सहयोग करना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उसके सपनों को साकार करने में सहभागी बनना है।
कुसुम कांता के योगदान को किया याद
मुख्यमंत्री ने स्व. श्रीमती कुसुम कांता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संगीत, साहित्य और शिक्षा के प्रति उनका समर्पण प्रेरणादायी रहा। उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए कुसुम कांता फाउंडेशन पिछले छह वर्षों से शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने मंथन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास, सामाजिक जागरूकता एवं जनकल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की।
गुरु का स्थान सर्वोच्च : धामी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। शिक्षक विद्यार्थी को केवल विषय का ज्ञान नहीं देता, बल्कि उसमें आत्मविश्वास, संस्कार, जीवन-मूल्य और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करता है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को ऐसी शिक्षा और संस्कार दें, जिससे वे बेहतर विद्यार्थी के साथ-साथ अच्छे इंसान और जिम्मेदार नागरिक भी बन सकें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ ही शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
अभिभावक बच्चों को समय और संस्कार भी दें
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को केवल सुविधाएं उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उन्हें समय देने, अच्छे संस्कार देने और प्रत्येक परिस्थिति में सकारात्मक मार्गदर्शन करने की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बच्चे का उज्ज्वल भविष्य विद्यालय और परिवार के सामूहिक प्रयास से ही तैयार होता है। आने वाली पीढ़ी के निर्माण में माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, अनुशासन एवं दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें। असफलताओं से सीख लेते हुए लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कठिन रास्ते ही अक्सर बड़ी मंजिलों तक पहुंचाते हैं। विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे भविष्य में शिक्षक, वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, खिलाड़ी, उद्यमी अथवा प्रशासनिक अधिकारी किसी भी क्षेत्र में जाएं, लेकिन सबसे पहले अच्छे इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनें। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के विद्यार्थी ज्ञान, प्रतिभा, मेहनत और संस्कारों के बल पर उत्तराखंड तथा देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
कुसुम कांता के जीवन-मूल्यों को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि : निशंक
पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी धर्मपत्नी स्व. श्रीमती कुसुम कांता का भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा, साहित्य, संगीत और समाजसेवा के प्रति उनका विशेष अनुराग था। शिक्षिका के रूप में उन्होंने शिक्षा और संस्कारों को सदैव प्राथमिकता दी। उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा एवं समाजहित में कार्य करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
डॉ. निशंक ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का आधार है। शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ संस्कार, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया। उन्होंने कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रयासों की भी सराहना की।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर, प्रो. सुधारानी पाण्डेय, कुसुम कांता फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक, आर्यन देव उनियाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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