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बधाण की नन्दा डोली पहुची मुन्दोली, वाण में हुआ चार देव डोलियों का मिलन

By: Naveen Joshi

On: Wednesday, September 16, 2026 7:30 PM

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चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )

कुरूड़ नन्दा धाम की राजराजेश्वरी नन्दा की बड़ी जात मंगलवार को अपने 12 वें पड़ाव मुन्दोली गांव पहुंच गई। वहीं दूसरी ओर दशोली व बण्ड परगनों की नन्दा देवी की डोलियां का कनोल गांव में विशेष देवी पूजन हुआ। यहां ल्वाणी गांव से आई ज्वालपा देवी की डोली का भी अन्य देवी डोलियों और छंतोलियों से मिलन हुआ। बुधवार को लाटू धाम वांण में बधाण, दशोली व बंड की नन्दा डोलियों तथा ज्वालपा देवी का भावपूर्ण मिलन होगा।

मंगलवार को बधाण की नन्दा देवी की उत्सव डोली अपने 11 वें पड़ाव फल्दिया गांव से मुन्दोली के लिए रवाना हुई। विदाई के अवसर पर सवाण, लौसरी, ग्वीला, उलंग्रा सहित आसपास के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर मनौतियां मांगी। फल्दिया गांव में यात्रा के स्वागत में अठवाड़ मेले का आयोजन किया गया। सोमवार रात से मंगलवार तक देव पूजा होती रही। इस दौरान नन्दा देवी सहित विभिन्न देवी देवताओं के पश्वाओं ने नृत्य कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।

ग्राम प्रधान प्रेम सिंह बिष्ट, नन्दन सिंह, देव सिंह और प्रमोद सिंह सहित ग्रामीणों ने मंगलवार को डोली को अपने पड़ाव के लिये विदा किया। यात्रा दोपहर करीब साढ़े बारह बजे काण्डे गांव पहुंची, जहां देवी पूजन के तहत आयोजित सोलपाती मेले में शामिल हुई। इसके बाद डोली लब्बू गांव होते हुए पिलखड़ा स्थित नन्दा देवी मंदिर पहुंची। जहां दो दिवसीय राजकीय राजराजेश्वरी सांस्कृतिक संरक्षण मेला आयोजित किया गया।

पिलखड़ा में मेला समिति अध्यक्ष महावीर बिष्ट, हाट कल्याणी वार्ड की जिला पंचायत सदस्य उर्मिला बिष्ट, ल्वाणी की ग्राम प्रधान मीना देवी, युवक मंगल दल अध्यक्ष दीपक बिष्ट, भूपेन्द्र सिंह भुप्पी और पूर्व प्रधान महिपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने डोली की अगुवानी की। पूजा अर्चना के बाद यात्रा ल्वाणी, बगड़ीगाड और हरनी होते हुऐ अपने 12 वें पड़ाव मुन्दोली पहुंची। इधर दशोली व बंड की नन्दा डोलियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी जात यात्रा में शामिल छंतोलियां मंगलवार को कनोल में ही रूकी रही। सोमवार देर शाम ल्वाणी से आई ज्वालपा देवी की डोली का यहां अन्य देव गोलियों से मिलन हुआ। कनोल में 12 वर्ष बाद नन्दा भगवती की विशेष पूजा की गई। जिसमें नन्दानगर क्षेत्र सहित चमोली जिले, उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों और दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

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