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अमृता में जुटे दक्षिण एशिया के शिक्षाविद, यूनेस्को की नई रणनीति पर मंथन

By: Naveen Joshi

On: Thursday, June 4, 2026 4:32 PM

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अमृतपुरी (केरल)। यूनेस्को के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक Tim Curtis ने कहा कि यूनेस्को चेयर्स संगठन की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं, जो शिक्षा, शोध और नीति निर्माण के बीच महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करती हैं। उन्होंने यह बात अमृता विश्व विद्यापीठम में आयोजित दक्षिण एशिया यूनेस्को चेयर्स राउंड टेबल के दौरान कही।

दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय बैठक में भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के 22 से अधिक प्रतिनिधियों, यूनेस्को चेयरधारकों तथा शिक्षाविदों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्रीय शोध, नवाचार और सामुदायिक पहलों को यूनेस्को की वर्ष 2026–2027 की रणनीतिक प्राथमिकताओं के साथ जोड़ना था।

बैठक में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के क्षरण और प्रदूषण से उत्पन्न “ट्रिपल प्लैनेटरी क्राइसिस”, डिजिटल परिवर्तन, नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), लैंगिक समानता तथा युवाओं की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में बांग्लादेश के लिए यूनेस्को प्रतिनिधि Susan Vize तथा नेपाल के लिए यूनेस्को प्रतिनिधि Jaco du Toit भी शामिल हुए। हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित इस राउंड टेबल के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अमृता विश्व विद्यापीठम की कुलाधिपति Mata Amritanandamayi Devi से भी मुलाकात कर विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।

गौरतलब है कि Amrita Vishwa Vidyapeetham देश का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां तीन यूनेस्को चेयर्स स्थापित हैं। इनमें जेंडर इक्वैलिटी एंड वीमेन एम्पावरमेंट, एक्सपीरिएंशियल लर्निंग फॉर सस्टेनेबल इनोवेशन एंड डेवलपमेंट तथा असिस्टिव टेक्नोलॉजीज़ इन एजुकेशन शामिल हैं। इन चेयर्स के माध्यम से विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक विकास के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

 

 

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Naveen Joshi

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