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दो दिन भारी बारिश का अलर्ट, उत्तराखंड में प्रशासन हाई अलर्ट पर

By: Naveen Joshi

On: Wednesday, July 8, 2026 8:01 PM

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देहरादून,। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर रौद्र रूप दिखाने की तैयारी में है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), देहरादून के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 09 और 10 जुलाई को प्रदेश के अनेक जनपदों में भारी से अत्यंत भारी वर्षा, आकाशीय बिजली और तेज वर्षा के दौर की प्रबल संभावना है। मौसम की गंभीर चेतावनी को देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

9 जुलाई के लिए देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और चम्पावत जनपदों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट जारी करते हुए कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।

10 जुलाई को भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रहेगा। पौड़ी, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, चम्पावत और बागेश्वर के लिए ऑरेंज अलर्ट, जबकि देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा।

लगातार वर्षा की आशंका को देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने जिलाधिकारियों को संवेदनशील एवं भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने, राहत एवं बचाव दलों को हर समय तैयार रखने, सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जिला सूचना अधिकारियों को भी मौसम संबंधी चेतावनियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें। उन्होंने अनावश्यक यात्रा से बचने, विशेषकर पर्वतीय एवं भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में नहीं जाने, नदी-नालों और बरसाती गधेरों से दूर रहने तथा खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही सभी संबंधित विभागों को 24×7 सतर्कता बनाए रखते हुए आवश्यक संसाधन और मानवबल उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी संभावित आपदा का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

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