देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल जी ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्रीय चेतना के जागरण के लिए समर्पित किया। राम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक जनांदोलन का स्वरूप प्रदान करने में उनकी भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी। उन्होंने जिस अखंड, सुरक्षित और स्वाभिमानी भारत का संकल्प लिया था, उसे साकार करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
मुख्यमंत्री राजकीय दून मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम, पटेलनगर में विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विश्व हिंदू परिषद की पत्रिका ‘विश्व हिंदू’ के अशोक सिंघल जी पर प्रकाशित विशेषांक का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री ने अशोक सिंघल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा और समाज को संगठित करने की प्रेरणादायी मिसाल है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्तित्व का वास्तविक मूल्य उसके पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके विचारों, आचरण और समाज के प्रति योगदान से निर्धारित होता है।
अशोक सिंघल जी ने सादगी, सहजता और सेवाभाव के माध्यम से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आदर्श प्रस्तुत किया। उनके विचार और कार्य आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देते रहेंगे।
राम जन्मभूमि आंदोलन को जनांदोलन बनाने में निभाई अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रथम धर्म संसद से लेकर राम जन्मभूमि आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप प्रदान करने तक अशोक सिंघल जी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने देशभर में संतों, धर्माचार्यों और समाज के विभिन्न वर्गों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ने का कार्य किया। भगवान श्रीराम के आदर्शों को भारतीय समाज के जीवन-मूल्यों का आधार मानने वाले अशोक सिंघल जी मर्यादा, सेवा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा के पक्षधर थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यदि अशोक सिंघल जी आज हमारे बीच होते, तो श्रीराम मंदिर के भव्य स्वरूप को देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता और आत्मिक संतोष होता।
समान नागरिक संहिता और कानून-व्यवस्था को बताया सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता और सभी नागरिकों के अधिकारों का सम्मान राष्ट्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। इसी दिशा में उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगा रोधी कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने, गौवंश के संरक्षण और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए भी निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं।
युवाओं को सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल जी ऐसे भारत की कल्पना करते थे, जहां युवा आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति भी जागरूक हों। युवा शक्ति राष्ट्र की महत्वपूर्ण पूंजी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार युवाओं को नशे से दूर रखने तथा शिक्षा, खेल, रोजगार और सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने के लिए प्रयास कर रही है।
उन्होंने दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के अध्ययन को प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझे और इस विरासत को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने में योगदान दे, यह समय की आवश्यकता है।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपराओं, प्राचीन मंदिरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। राज्य सरकार इस विरासत के संरक्षण के साथ तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। केदारखंड मंदिर माला मिशन और मानसखंड मंदिर माला मिशन के साथ हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने हरिपुर-कालसी में मां यमुना के तट पर स्नान घाट के लोकार्पण और मां यमुना की 21 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में मां यमुना मंदिर और भगवान श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य प्रदेश की धार्मिक पहचान को सुदृढ़ करने के साथ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
कुंभ को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाला कुंभ सनातन संस्कृति, भारतीय आस्था और प्राचीन धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण आयोजन होगा। कुंभ देश की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। राज्य सरकार इसे दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल जी का जीवन राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने, सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण करने और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की प्रेरणा देता है। उनके जन्म शताब्दी वर्ष को सार्थक बनाने का वास्तविक माध्यम उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने और श्रेष्ठ राज्य के निर्माण के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।
इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज, पूज्य संत-महात्मा, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।












