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कपाट बंद होने से पहले बाबा केदार के दरबार में शीश नवाएंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

By: Naveen Joshi

On: Thursday, October 22, 2026 2:03 AM

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देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा पर स्थित विश्वप्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग बाबा केदारनाथ धाम में शीतकालीन कपाट बंद होने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बाबा केदार के दर्शन कर आशीर्वाद लेंगी। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति 2 नवंबर को केदारनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करेंगी। उनके इस धार्मिक दौरे को लेकर शासन-प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

बाबा केदार की दिव्य धरा पर राष्ट्रपति के आगमन को लेकर उत्तराखंड शासन से लेकर रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन तक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने संबंधित विभागों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए सुरक्षा, आवागमन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

1 नवंबर को देहरादून पहुंचेंगी राष्ट्रपति
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 1 नवंबर की शाम करीब 4:45 बजे देहरादून स्थित जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचेंगी। यहां प्रोटोकॉल के तहत उनके स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं। एयरपोर्ट से राष्ट्रपति सीधे लोक भवन के लिए रवाना होंगी, जहां उनकी उत्तराखंड के राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन से शिष्टाचार भेंट प्रस्तावित है। रात्रि विश्राम भी लोक भवन में ही होगा।

बाबा केदार के दरबार में करेंगी पूजा-अर्चना
दौरे के दूसरे दिन, 2 नवंबर की सुबह राष्ट्रपति विशेष हेलीकॉप्टर से केदारनाथ धाम के लिए रवाना होंगी। धाम में उनके लगभग एक घंटे तक रुकने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस दौरान वह बाबा केदार के गर्भगृह में दर्शन-पूजन और रुद्राभिषेक कर सकती हैं। साथ ही धाम के मुख्य पुजारियों और तीर्थ पुरोहितों से मुलाकात की भी संभावना है। दर्शन-पूजन के बाद राष्ट्रपति जौलीग्रांट एयरपोर्ट लौटेंगी, जहां से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी।

कपाट बंद होने से पहले बाबा केदार के दर्शन
केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने से पहले राष्ट्रपति का यह प्रस्तावित दौरा धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। परंपरा के अनुसार, शीतकाल में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं तथा बाबा केदार की पूजा-अर्चना शीतकालीन गद्दीस्थल पर संपन्न होती है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को भैयादूज के पावन पर्व पर सुबह 8:30 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाने हैं। कपाट बंद होने से कुछ दिन पहले राष्ट्रपति के बाबा केदार के दर्शन का यह प्रस्तावित कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष आकर्षण का विषय है। देश की प्रथम नागरिक के इस धार्मिक दौरे से देवभूमि की आध्यात्मिक गरिमा और बाबा केदार की महिमा एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहेगी।

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