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धर्म की ओर उन्मुख होने के लिए चातुर्मास एक प्रभावी माध्यम: आचार्य सौरभसागर महाराज

By: Naveen Joshi

On: Tuesday, July 8, 2025 10:41 AM

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जैन भवन में हुई पत्रकार वार्ता, 31वें पुष्प वर्षायोग के लिए पहुंचे देहरादून

देहरादून। जैन महामुनि राज आचार्य सौरभसागर महाराज ने कहा कि चातुर्मास धर्म, सदाचार, और आत्मशुद्धि का अनूठा अवसर है, जो समाज को आध्यात्मिक जागरूकता की दिशा में ले जाता है। यह समय वैदिक आचरण, अहिंसा, संयमित खानपान और स्वास्थ्य लाभ जैसे संकल्पों को जीवन में उतारने का होता है। जैन भवन, देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि 31वें पुष्प वर्षायोग के लिए उनका आगमन दून में हुआ है। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि नौ जुलाई को मंगल कलश स्थापना का आयोजन होगा, जिससे वर्षायोग का औपचारिक आरंभ होगा। छह वर्षों बाद उन्हें पुनः देहरादून में पुष्प योग का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है।उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान जब सभी देवता विश्राम करते हैं, तब संतजनों की भूमिका और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। संत समाज में सतत जागरूकता और आध्यात्मिक ऊर्जा बनाए रखते हैं।युवाओं के विषय में उन्होंने कहा कि धर्म उन्हें सामर्थ्य प्रदान करे जिससे वे समाजोपयोगी भूमिका में आएं। इसके लिए आवश्यक है कि नई पीढ़ी को नैतिकता, मानवता और धर्म के मूल सिद्धांतों से जोड़ा जाए।धर्म के विकृत स्वरूप पर टिप्पणी करते हुए आचार्य सौरभसागर महाराज ने कहा कि आज के समय में यह पहचानना अत्यंत आवश्यक है कि सच्चा संत कौन है। समाज के नैतिक उत्थान के लिए सच्चे संत का सान्निध्य प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है ।

 

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