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कवि समाज के चिंतक, मार्गदर्शक और प्रेरक होते हैं : मुख्यमंत्री धामी

By: Naveen Joshi

On: Saturday, June 6, 2026 7:14 PM

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कालाढुंगी में ‘अभिव्यंजना 5.0’ का शुभारंभ, देश के प्रख्यात कवियों और साहित्यकारों का हुआ सम्मान

रामनगर/कालाढुंगी/हल्द्वानी,। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कालाढुंगी तहसील स्थित नमस्ते कॉर्बेट रिज़ॉर्ट, धनपुर धमोला में ललित फाउंडेशन के पंचम अधिवेशन ‘अभिव्यंजना 5.0’ का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक कवि सम्मेलन नहीं, बल्कि विचारों, भावनाओं और सृजनशीलता को अनुभव करने का एक अभिनव मंच है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कवि केवल शब्दों के निर्माता नहीं होते, बल्कि वे समाज के चिंतक, मार्गदर्शक और प्रेरक भी होते हैं। उनकी रचनाएं समाज को दर्पण दिखाने का कार्य करती हैं। जब समाज विभिन्न चुनौतियों और उलझनों से घिरता है, तब कवि अपनी लेखनी के माध्यम से नई दिशा देने के साथ सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को भी कवियों और साहित्यकारों की रचनाओं से नई ऊर्जा मिली थी।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित प्रख्यात कवियों की सराहना करते हुए कहा कि डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी विशिष्ट प्रस्तुति शैली से कविता को नई पहचान दी है। वहीं पद्मश्री अशोक चक्रधर की रचनाएं हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती हैं। डॉ. हरिओम पंवार की ओजस्वी कविताएं राष्ट्रभक्ति और जनचेतना की सशक्त अभिव्यक्ति हैं, जो श्रोताओं को ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा कि सभी कवियों ने साहित्य को मंचों तक सीमित न रखकर जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है और युवाओं को साहित्य से जोड़ने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से साहित्य, संस्कृति और सृजन की भूमि रही है। हिमालय की गोद में बसी इस पावन धरती ने अनेक साहित्यकारों, कवियों और लोकचिंतकों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपनी लेखनी से समाज को दिशा देने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुमित्रानंदन पंत, चंद्रकुंवर बर्त्वाल, गिर्दा, शैलेश मटियानी, गौरा पंत ‘शिवानी’ और मोहन उप्रेती जैसे साहित्यकारों ने उत्तराखंड की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है। उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दे रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कवियों, कवित्रियों एवं साहित्यकारों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली सोच का सम्मान है।

मुख्यमंत्री ने उपस्थित साहित्यकारों और कवियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे साहित्य और संस्कृति की इस चेतना को नई ऊर्जा और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जब ये प्रख्यात कवि मंच पर अपनी प्रस्तुति देते हैं, तो उनकी कविताएं केवल शब्द नहीं रह जातीं, बल्कि जनमानस के लिए प्रेरणा और परिवर्तन का स्वर बन जाती हैं।

कार्यक्रम में विधायक बंशीधर भगत, डॉ. कुमार विश्वास, पद्मश्री अशोक चक्रधर, डॉ. हरिओम पंवार सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवि एवं साहित्यकार उपस्थित रहे।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री के आईआरबी बेलपड़ाव, रामनगर पहुंचने पर विधायक बंशीधर भगत, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, उपाध्यक्ष गणेश रावत, दर्जा राज्यमंत्री सुरेश भट्ट, शंकर कोरंगा, सुरेंद्र नामधारी, आयोग सदस्य जेड.ए. वारसी, मंडलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडेय सहित जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों ने उनका पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया।

 

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