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लोकतंत्र बचाओ यात्रा पर कांग्रेस का हमला, गरिमा दसौनी बोलीं- लोकतंत्र को कमजोर करने वाले आज बचाने का कर रहे दावा

By: Naveen Joshi

On: Tuesday, November 3, 2026 5:25 PM

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अमित शाह के देहरादून दौरे और 6 नवंबर को प्रस्तावित पदयात्रा पर उठाए सवाल, धनतेरस के दिन आयोजन से व्यापारियों और आम जनता को होने वाली परेशानी पर जताई चिंता
देहरादून। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 6 नवंबर को प्रस्तावित देहरादून दौरे और परेड ग्राउंड से निकलने वाली लोकतंत्र बचाओ यात्रा को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने यात्रा के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोपों से घिरी भाजपा आज लोकतंत्र बचाने की बात कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर भाजपा किससे लोकतंत्र बचाने की यात्रा निकाल रही है।

दसौनी ने वर्ष 2016 में उत्तराखंड की तत्कालीन हरीश रावत सरकार को अस्थिर करने के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय निर्वाचित सरकार को गिराने के लिए राजनीतिक जोड़तोड़, विधायकों की खरीद-फरोख्त और दलबदल को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रही है कि केंद्र की तत्कालीन भाजपा सरकार ने उत्तराखंड की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया। अन्य राज्यों में भी सरकारों को अस्थिर करने के मामलों में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में भाजपा की लोकतंत्र बचाओ यात्रा राजनीतिक विरोधाभास को दर्शाती है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के 25 हजार लोगों के पदयात्रा में शामिल होने के दावे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भीड़ जुटाना लोकतंत्र की रक्षा का प्रमाण नहीं है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता, जनादेश का सम्मान और नागरिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है।

उन्होंने 6 नवंबर को धनतेरस के दिन कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर भी आपत्ति जताई। दसौनी ने कहा कि धनतेरस का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन बाजारों में खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में शहर के प्रमुख हिस्से में बड़े राजनीतिक आयोजन और पदयात्रा से यातायात प्रभावित होने के साथ व्यापारियों के कारोबार और आम लोगों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि कार्यक्रम के कारण आम जनता, व्यापारियों और श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी कौन लेगा।

दसौनी ने प्रदेश की भाजपा सरकार और केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि उत्तराखंड की जनता ने भाजपा को दो बार विधानसभा में प्रचंड बहुमत दिया और पांचों लोकसभा सीटों पर भी लगातार समर्थन दिया, लेकिन प्रदेश को डबल इंजन सरकार से जिन विकास कार्यों और सुविधाओं की उम्मीद थी, वे सवाल आज भी बने हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व की ओर से उत्तराखंड को देश का नंबर वन राज्य बनाने के वादे का उल्लेख करते हुए पूछा कि इन घोषणाओं का धरातल पर कितना लाभ मिला।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बेरोजगारी, महिला अपराध, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में परिवार और प्रदेश की जनता आज भी न्याय की अपेक्षा कर रही है। वहीं, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मुआवजे, पुनर्वास और स्थायी समाधान की मांग भी बनी हुई है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि उत्तराखंड को ग्रीन बोनस, विशेष औद्योगिक पैकेज और विशेष राज्य के दर्जे की बहाली जैसे मुद्दों पर भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र में मजबूत बहुमत और प्रदेश में डबल इंजन सरकार होने के बावजूद युवाओं, महिलाओं, किसानों, व्यापारियों और आपदा प्रभावितों की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हो पाया।

दसौनी ने अंत में कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लोकतंत्र बचाओ यात्रा निकालने से पहले उत्तराखंड की जनता को प्रदेश से किए गए वादों का हिसाब देना चाहिए। लोकतंत्र केवल नारों और पदयात्राओं से नहीं, बल्कि जनता के जनादेश, संवैधानिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों के सम्मान से मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब घोषणाओं के बजाय अपने सवालों के जवाब और सरकार के कामकाज का हिसाब चाहती है।

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