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शिक्षक विद्यार्थियों का भविष्य संवारने के साथ राष्ट्र का चरित्र गढ़ते हैं : डॉ. धन सिंह रावत

By: Naveen Joshi

On: Saturday, September 5, 2026 7:43 PM

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देहरादून, । शिक्षक केवल विद्यार्थियों को ज्ञान देने का कार्य नहीं करते, बल्कि उनके व्यक्तित्व का निर्माण कर राष्ट्र के भविष्य की नींव मजबूत करते हैं। शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उनमें आत्मविश्वास जगाएं और उन्हें बड़े सपने देखने के साथ उन्हें साकार करने का साहस दें। यह बात राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने  शिक्षक दिवस के अवसर पर लोक भवन में आयोजित ‘शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार-2025’ सम्मान समारोह में कही।
समारोह में राज्यपाल एवं विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 19 शिक्षक-शिक्षिकाओं को शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस दौरान शिक्षकों के समर्पण, सेवाभाव और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे अनुकरणीय कार्यों की सराहना की गई।
राज्यपाल ने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों का जीवन संवारने के साथ राष्ट्र का चरित्र गढ़ते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों में सोचने, समझने, प्रश्न करने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें निरंतर प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों में से 19 शिक्षकों का चयन होना उनके उत्कृष्ट कार्य, समर्पण और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार महज सम्मान नहीं, बल्कि शिक्षकों के समर्पण और सेवाभाव की पहचान है। प्रसिद्ध साहित्यकार एवं कथाकार शैलेश मटियानी के नाम पर प्रदान किया जाने वाला यह पुरस्कार शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
डॉ. रावत ने कहा कि शैलेश मटियानी ने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की। उनकी प्रमुख कृतियों को प्रदेश के विद्यालयी पुस्तकालयों में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी उत्तराखंड की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सके।
उन्होंने कहा कि आज का शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है। वह विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवाचार, नैतिक मूल्यों और आत्मविश्वास का निर्माण कर रहा है। प्रत्येक विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ने के लिए उचित मार्गदर्शन देना शिक्षक का महत्वपूर्ण दायित्व है।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। तकनीक और नवाचार के साथ शिक्षक की संवेदनशीलता का समन्वय भविष्य की शिक्षा को नई दिशा देगा। विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान के साथ अपनी लोकसंस्कृति, पर्यावरण और हिमालयी विरासत से जोड़ना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण दायित्व है।
समारोह में अपर सचिव राज्यपाल  रीना जोशी, अपर सचिव शिक्षा  नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा  आकांक्षा कोंडे सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
प्रारंभिक शिक्षा श्रेणी: विष्णुपाल सिंह नेगी (पौड़ी गढ़वाल), लखपत सिंह रावत (चमोली), पृथ्वी सिंह रावत (उत्तरकाशी), वीरेंद्र सिंह रावत (देहरादून), रोबिन कुमार (हरिद्वार), महेश्वर प्रसाद सेमवाल (टिहरी), शशिकांत नौटियाल (रुद्रप्रयाग), जहीर अब्बास (चंपावत), नौ सिंह (ऊधमसिंह नगर), डॉ. श्वेता मजगांई (नैनीताल), विक्रम सिंह परिहार (पिथौरागढ़) एवं त्रिलोक सिंह अधिकारी (अल्मोड़ा)।
माध्यमिक शिक्षा श्रेणी: नरेंद्र सिंह नेगी (पौड़ी गढ़वाल), डॉ. सुमन ध्यानी शर्मा (चमोली), डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव (देहरादून), श्रीमती कमलेश पंवार (हरिद्वार), नवीन चंद्र पंत (चंपावत) एवं विशन सिंह मेहता (नैनीताल)।
प्रशिक्षण संस्थान श्रेणी: डॉ. सुबोध सिंह बिष्ट (उत्तरकाशी)।
विशेष सम्मान—राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025:
श्रीमती मंजूबाला (चंपावत)।

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