देहरादून। कृषि केवल अन्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका का प्रमुख आधार है। वहीं बागवानी किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा और कृषि विविधीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वानिकी पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु संतुलन बनाए रखने में अहम योगदान देती है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच इन तीनों क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है।
इसी उद्देश्य को लेकर श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय (एसजीआरआरयू), देहरादून के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, आईसीएआर से मान्यता प्राप्त, की ओर से 15वें अंतरराष्ट्रीय कृषि, बागवानी एवं वानिकी सम्मेलन का आयोजन किया गया। दो दिवसीय सम्मेलन का विषय “कृषि, बागवानी एवं वानिकी : जलवायु-लचीली फसल प्रणालियों के लिए नवाचार” रहा।
हाइब्रिड मोड में आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की। इस दौरान जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को अधिक टिकाऊ, उत्पादक और जलवायु-लचीला बनाने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. जी.एस. सचदेवा, उप निदेशक, पशुपालन विभाग, उत्तराखंड सरकार तथा डॉ. अमरीक सिंह, गन्ना आयुक्त, पंजाब सरकार ने सहभागिता की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. मनीष भंडारी, प्रमुख, जेनेटिक्स एवं ट्री इम्प्रूवमेंट डिवीजन, वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई), देहरादून, डॉ. संजय कुमार राठी, प्रोफेसर, एग्रोनॉमी, जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर तथा डॉ. अनुपम बड़, जेनेटिक्स एवं प्लांट ब्रीडिंग, आईसीएआर-आईआईएसडब्ल्यूसी, देहरादून उपस्थित रहे।
सम्मेलन में डॉ. डी.पी.एस. बड़वाल, संस्थापक एवं सीईओ, जस्ट एग्रीकल्चर एजुकेशन ग्रुप, डॉ. सुशीला हुड्डा, अध्यक्ष, इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट तथा डॉ. हितेंद्र कुमार, डीन, स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, एसजीआरआरयू सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं संकाय सदस्य मौजूद रहे।
सम्मेलन में भारत एवं विदेशों से 200 से अधिक वैज्ञानिकों, संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने हाइब्रिड माध्यम से सहभागिता की। विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि, बागवानी एवं वानिकी के सामने उत्पन्न चुनौतियों, बदलते मौसम का फसल उत्पादन पर प्रभाव, टिकाऊ कृषि पद्धतियों, उन्नत तकनीकों तथा जलवायु-लचीली फसल प्रणालियों की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
विशेषज्ञों ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में ऐसी कृषि तकनीकों और फसल प्रणालियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, जो सीमित संसाधनों में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी बनाए रखें। कृषि, बागवानी एवं वानिकी के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित कर किसानों की आय बढ़ाने, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
सम्मेलन के माध्यम से वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों के बीच ज्ञान, अनुभव और नवीन तकनीकों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिला। विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन की मौजूदा चुनौतियों के अनुरूप भविष्य की कृषि प्रणालियों को विकसित करने के लिए अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और नवाचार को मजबूत करने पर जोर दिया।













