देहरादून, ग्राफिक एरा के विशेषज्ञ महिलाओं को आर्किड उत्पादन की ट्रेनिंग दे रहे हैं। यह ट्रेनिंग आज ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में शुरू हो गई।
इस ट्रेनिंग में राज्य के विभिन्न स्थानों से आई महिलाएं भाग ले रही हैं। यह ट्रेनिंग दो दिन चलेगी। ट्रेनिंग के पहले दिन आज कुलपति डा. नरपिन्दर सिंह ने प्रशिक्षुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य में पाये जाने वाले औषधीय पेड़-पौधों, फूलों, फलों व पारम्परिक व्यजंनों को संरक्षित करके व्यवसाय में बदला जा सकता है। इसके लिए किसानों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। आईक्यूएसी के निदेशक डा. संतोष एस. सर्राफ ने कहा कि खेती में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आर्किड उत्पादन का प्रशिक्षण लेकर वे इसका सफल व्यापार कर सकेंगी।
ट्रेनिंग की प्रमुख अन्वेषक व बाॅयोटेक्नोलाजी विभाग की एचओडी डा. मनु पंत ने कहा कि आर्किड खेती आय का बेहतरीन विकल्प है। बाजार में 800-1500 रूपये में बिकने वाले आर्किड की 236 प्रजातियां उत्तराखण्ड में पाई जाती हैं। इनमें से 17 प्रजातियों का उपयोग दवाई उत्पादन में किया जाता है। उन्होंने एराइड्स मल्टीफ्लोरा, रिनकोस्टिलिस रेट्यूसा, सिमबिडियम, कैटलेया व अन्य तरहों के आर्किड पर विस्तार से जानकारी दी। मैनेजमेण्ट विभाग के एचओडी डा. नवनीत रावत ने एथिकल फार्मिंग पर जानकारी साझा की।
ट्रेनिंग का आयोजन डिपार्टमेण्ट आॅफ बायोटेक्नोलाजी और डिपार्टमेण्ट आॅफ मैनेजमेण्ट स्टडीज ने कृषि विभाग, उत्तराखण्ड के जैव प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से किया। ट्रेनिंग में सह-प्रमुख अन्वेषक कार्तिकेय रैना और पीएचडी स्कालर्स मौजूद रहे।
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