देहरादून, विश्व संवाद केंद्र, देहरादून द्वारा प्रकाशित पाक्षिक पत्रिका ‘हिमालय हुंकार’ के दिवाली विशेषांक का भव्य विमोचन समारोह आज आईआरडीटी सभागार, देहरादून में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम मुख्य वक्ता के रूप में तथा लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. जयवीर सिंह नेगी जी कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विभाग प्रचार प्रमुख श्री गजेन्द्र खण्डूरी जी ने किया।
मुख्य वक्तव्य में पदम ने कहा कि “आज का युग वैचारिक युद्ध का काल है — यह युद्ध रणभूमि पर नहीं, बल्कि ‘मनभूमि’ पर लड़ा जा रहा है।” उन्होंने कहा कि “जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है,” यह केवल आस्था का नहीं, बल्कि भारतीय जीवनदृष्टि का शाश्वत सिद्धांत है।
उन्होंने आगे कहा कि आज समाज को परिवार के मूल्य और परंपरा की पुनः प्रतिष्ठा की आवश्यकता है, क्योंकि सशक्त परिवार ही सशक्त समाज और राष्ट्र का आधार है। उन्होंने बताया कि संघ अपने शताब्दी वर्ष में पाँच प्रमुख विषयों — सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जागरण और नागरिक कर्तव्य पालन — पर विशेष बल दे रहा है।
‘हिमालय हुंकार’ के दिवाली विशेषांक “धर्मो रक्षति रक्षितः — भारतीय संविधान अनुच्छेद 26 : विविधता से अखंडता तक” में भारतीय संस्कृति, परंपरा, सामाजिक जीवन और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर विद्वानों और चिंतकों के लेख संकलित किए गए हैं।
कार्यक्रम में शहर के अनेक बौद्धिक, सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्रों से जुड़े गणमान्यजन उपस्थित रहे, जिनमें शाक्त ध्यानी (संपादक, हलंत पत्रिका), राजकुमार टोंक (सचिव, विश्व संवाद केंद्र), संजय जी (प्रांत प्रचार प्रमुख), बृजेश बनकोटी (प्रांत सह प्रचार प्रमुख), धनंजय जी (विभाग प्रचारक), अरुण शर्मा (विभाग सह कार्यवाह), प्रदीप आनंद, प्रेम चमोला, मनीष बागड़ी सहित अनेक स्वयंसेवक बंधु सम्मिलित हुए।
सभी उपस्थित जनों ने पत्रिका के इस विशेषांक की सराहना की और समाज में सकारात्मक वैचारिक संवाद एवं राष्ट्र चेतना के प्रसार की दिशा में ‘हिमालय हुंकार’ की भूमिका को सराहा।
