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इंटक 18 को कर्मचारियों, महिलाओं व बेरोजगारों की माँगों को लेकर सचिवालय कूच

By: prabhatchingari

On: Monday, September 16, 2024 1:56 PM

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देहरादून, राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) से सम्बन्धित सभी यूनियनें 18 सितम्बर, को प्रातः 11 बजे कांग्रेस भवन से मांगों को लेकर हीरा सिंह बिष्ट पूर्व मंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष इंटक के नेतृत्व में सचिवालय कूच कर महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड सरकार को निम्न मांगों को लेकर मुख्य सचिव के माध्यम से ज्ञापन दिया जायेगा।
प्रमुख मांगे:-
1- दिनांक 22 मई, 2024 के समाचार पत्र दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर “गोल्डन फॉरेस्ट की प्रॉपर्टी होगी नीलाम” का संज्ञान लेने का कष्ट करें, जिसके अनुसार मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा ऐतिहासिक निर्णय लेते हुये प्रदेश में स्थित गोल्डन फॉरेस्ट की भूमि की नीलामी करते हुए प्राप्त राजस्व को प्रदेश के राजकोष में जमा कराये जाने के आदेश किये गये हैं, इस आदेश पर शीघ्र कार्यवाही अमल में लाई जाय।
2- उत्तराखण्ड में जमीनों को भू-माफियाओं व प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा मनमाने ढंग से की जा रही लूट पर अंकुश लगाये जाने हेतु हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर कठोर भू-कानून बनाते हुए प्रदेश में लागू किया जाय।
3- राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में 10 वर्षों से अधिक कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण सुनिश्चित किया जाये अथवा मा० उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के समान कार्य पर समान वेतन के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाय।
4- स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट व स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत किये गये खर्चो की उच्च स्तरीय जांच करे व दोषियों के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाय।
5- अन्य राज्यों के कर्मचारियों की भांति इस प्रदेश में भी पुरानी पेंशन व्यव्स्था बहाल की जाय तथा प्रत्येक कर्मचारी को सेवाकाल में न्यूनतम तीन पदोन्नति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय।
6- ओ०एन०जी०सी० मुख्यालय को देहरादून से बाहर स्थानान्तरित किए जाने के पड्यत्र को बन्द किया जाए।
7- केन्द्र सरकार के व उत्तराखण्ड के गौरवशाली प्रतिष्ठानों (रक्षा कारखानों, फॉरेस्ट रिसर्च इस्टीट्यूट सर्वे ऑफ इण्डिया, बी.एच.ई.एल. हरिद्वार) को बाहरी कम्पनियों को सौंपने व उनकी सैकड़ों एकड़ भूमि को ठिकाने लगाने के कुछ अधिकारियों व राजनेताओं द्वारा रचे जा रहे षडयन्त्र पर तत्काल रोक लगायी जाये।
8- नगर निगम देहरादून में स्वच्छता समितियों के माध्यम से फर्जी पर्यावरण मित्रों की भर्ती की आड़ में करोड़ों का घोटाला।
9. राज्य में कार्यरत आशाओं, आंगनबाडी कार्यकतियों व भोजन माताओं को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाये अथवा राज्य कर्मचारियो के समान लाभ दिये जायें। 
10- किसानों की उपज का उचित मूल्य निर्धारित किया जाय तथा अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त फसलों का किसानोउ को उचित मुआवजा दिया जाय साथ ही सुदुर पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों की उपज के डुलान का व्यय सरकार वहन करने में सहयोग प्रदान करें एवं गन्ना किसानों के अवशेष भुगतान को अति शीघ्र कराये जाय।
11- परिवहन निगम में कर्मचारियों की भार्तियों को किसी भी बाहरी कम्पनी को न देकर पूर्व की भाति विभाग के पास व्यवस्था यथावत रखा जाए।
12- उत्तराखण्ड में सिडकुल में स्थित कम्पनियों के पलायन को रोकने हेतू पूर्व मुख्यमंत्री स्व० नारायण दत्त तिवारी जी की सरकार द्वारा केन्द्र की सरकार के सहयोग से दी गयी विशेष राहत की सुविधाए बहाल करायी जाये जिससे बढ़ती बेरोजगारी पर अंकुश लग सकें।
13- राज्य में महिलाओं पर बढ़ते अत्यारों से महिलाओं में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है, चाहे अकिता भण्डारी का मामला हो अथवा ISBT देहरादून हरिद्वार एवं उधमसिंहनगर में महिला पर हो रही अत्याचारों की घटाओं पर कोई उचित कार्यवाही प्रदेश सरकार द्वारा नहीं किया जाना शर्मनाक एवं निदंनीय है। मांग की जाती है शीघ्र उचित कार्यवाही हो।
14- केदारनाथ मन्दिर में चढ़ावे का हजारों करोड़ का सोना गायब होने की सी०बी०आई० की जांच की जायें।
15- श्रम विभाग की निष्क्रियता के फलस्वरूप पूरे प्रदेश तन्त्र की तानाशाही चरम पर है जिस प्रकार हरिद्वार में सिडकुल के अन्तर्गत सत्यम कम्पनी सहित प्रदेश की अन्य कम्पनियों में बिना कारण सैकड़ों श्रमिकों को नियम विरूद्ध निकाला जा रहा है उस पर नियंत्रण लगाया जाय एवं निकाले गये श्रमिकों को पुनः काम पर वापस लिया जाय।
16- प्रदेश की नदियों में प्रतिवर्ष हो रहे भारी अवैध खनन पर अंकुश लगाने व सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध कब्जों को रोकने हेतु प्रभावी कार्यवाही करायी जाय एवं प्रदेश को करोड़ों रूपये की राजस्व हानि से बचाने हेतु कठोर कार्यवाही की जाय। 
17- कर्मकार बोर्ड के लगभग 250 करोड़ के गोलमाल की जांच सी०बी०आई० से करायी जाए तथा जांच रिर्पोट सार्वजनिक कर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाये।
18- बढ़ती मंहगाई व बरोजगार पर अंकुश लगाने हेतु प्रभावी कार्यवाही की जाय। केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकार श्रमिक कानूनों पर हमले बंद करे साथ ही श्रमिकों के हितों के विपरीत सरकार द्वारा पारित किए गये 44वें संशोधन को तत्काल रद्द किया जाय।

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