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कोरूबा की बेटियों को मिलेगा स्मार्ट शिक्षा और सुरक्षा का मजबूत घेरा

By: Naveen Joshi

On: Friday, August 1, 2025 6:51 PM

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डीएम सविन बंसल ने किया केजीबीवी कोरूबा का निरीक्षण, बालिकाओं की जरूरतों के अनुरूप सुधार के निर्देश

देहरादून,   जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा जनपद के दूरस्थ इलाकों में संचालित आवासीय विद्यालयों का निरीक्षण लगातार किया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को उन्होंने विकासखंड कालसी के कोरूबा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (केजीबीवी) का दौरा किया।

विद्यालय में 150 की क्षमता के सापेक्ष वर्तमान में 143 छात्राएं पढ़ रही हैं। डीएम ने यहां शैक्षणिक, आवासीय, सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

🔹 बेटियों के लिए बनेगा स्मार्ट क्लासरूम विद्यालय में स्मार्ट क्लास, वाईफाई, 10 कंप्यूटर, इन्वर्टर और 150 स्टडी टेबल की व्यवस्था जल्द होगी।

🔹 सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम विद्यालय परिसर में 10 सीसीटीवी कैमरे, बार्बेड वायर बाउंड्री और खेल मैदान का समतलीकरण कराया जाएगा।

🔹 स्थानीय महिलाओं को मिलेगा रोजगार

विद्यालय में योग प्रशिक्षक, कम्प्यूटर टीचर, गार्ड व सफाई कर्मी के पदों पर आसपास की महिलाओं की नियुक्ति के निर्देश दिए गए।
इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिलेगा।

🔹 छात्रावास सुविधाओं में होगा सुधार

डीएम ने 7 गीजर, 4 वाशिंग मशीन, 1 फ्रीजर, 150 डाइनिंग फर्नीचर और रोटी मेकर मशीन की व्यवस्था के लिए प्रस्ताव मांगे हैं।

🔹 सभी छात्राओं को खेल सामग्री और यूनिफॉर्म

143 छात्राओं को ट्रैक सूट और स्पोर्ट्स शूज दिए जाएंगे।

🔹 स्वास्थ्य जांच के लिए हर माह कैंप

आरबीएसके टीम को हर महीने स्कूल विजिट और हेल्थ कैंप लगाने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए गए हैं।

डीएम ने जल संस्थान को नई पेयजल लाइन बिछाने के लिए तुरंत कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। “बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के लिए हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। स्कूल में मौजूद हर चुनौती को जल्द समाधान के स्तर पर लाया जाएगा।” निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, सीईओ विनोद कुमार ढौंडियाल, सीएमओ डॉ एमके शर्मा, प्रधानाचार्य उर्मिला धीमान समेत कई विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।कोरूबा जैसे दुर्गम क्षेत्र में बेटियों के लिए आधुनिक और सुरक्षित शिक्षा की दिशा में यह कदम सराहनीय है। यदि ज़मीनी स्तर पर कार्य योजना समय से लागू होती है, तो यह मॉडल प्रदेश के अन्य दूरस्थ स्कूलों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

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Naveen Joshi

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