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भक्ति का महासंगम: सत्य साईं मंदिर में दो दिवसीय साधना-आराधना शिविर सम्पन्न, समर्पण और सेवा का गूंजा संदेश

By: Naveen Joshi

On: Sunday, April 5, 2026 4:44 PM

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देहरादून।,श्री सत्य साई सेवा संगठन उत्तराखण्ड द्वारा सुभाष नगर स्थित साईं मंदिर में आयोजित दो दिवसीय साधना-आराधना शिविर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। आत्मिक उन्नति, आध्यात्मिक जागरूकता एवं समर्पण की भावना को प्रबल बनाने हेतु आयोजित इस शिविर में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

शिविर का शुभारंभ 4 अप्रैल को प्रशांति ध्वजारोहण, दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। प्रदेशाध्यक्ष कर्नल योगेन्द्र सिंह ने अपने संबोधन में शिविर के उद्देश्य, आवश्यकता एवं आध्यात्मिक मूल्यों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। नेशनल आध्यात्मिक कोऑर्डिनेटर मुरली जाजू ने वर्चुअल माध्यम से मार्गदर्शन दिया, जबकि उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य वक्ताओं ने भी आध्यात्मिक आधार की अनिवार्यता पर विचार साझा किए।

शिविर के दूसरे दिन रविवार को वेद मंत्र उच्चारण, भजन की गुणवत्ता, व्यक्तिगत साधना, विद्या ज्योति, ज्योति ध्यान, स्टडी सर्कल एवं अध्यात्म की उपयोगिता जैसे विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। इस अवसर पर ऑल इंडिया प्रेसिडेंट निमिष पांड्या एवं कमला पांड्या ने वर्चुअल माध्यम से अपने विचार रखे। डॉ. ओ.पी. गुप्ता ने अध्यात्म और स्वास्थ्य के समन्वय तथा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में युवाओं की भूमिका पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।

दोपहर सत्र में पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में साई समिति की भूमिका, सेवा प्रकल्पों की महत्ता, नगर संकीर्तन, श्रीमद् भगवद्गीता के महत्व तथा समिति को सशक्त बनाने के सूत्रों पर विस्तार से चर्चा की गई।

शिविर में “समर्पण की प्रार्थना” का विशेष संदेश देते हुए वक्ताओं ने कहा कि जीवन की सभी चिंताओं, समस्याओं और भय को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देने से आंतरिक शांति प्राप्त होती है। सच्चा समर्पण व्यक्ति में विश्वास और धैर्य को सुदृढ़ करता है तथा जीवन की कठिनाइयों को सहज बनाता है। श्रद्धालुओं ने इस संदेश को आत्मसात करते हुए इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

प्रदेश उपाध्यक्ष कैप्टन अजय स्वरूप ने “सेवा” विषय पर अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पवित्र पद्धति है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भोजन शरीर को पोषण देता है, उसी प्रकार निस्वार्थ सेवा मन और आत्मा को निर्मल बनाती है। सच्ची सेवा वही है, जो बिना किसी अपेक्षा, प्रशंसा या पहचान के भाव से की जाए। छोटी-छोटी संवेदनशील अभिव्यक्तियाँ—जैसे एक मुस्कान, मधुर वचन या सहानुभूति—भी सेवा के महत्वपूर्ण रूप हैं।

समापन सत्र में नए दायित्वों की घोषणा, महा मंगल आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ शिविर का समापन हुआ। आयोजकों ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, नैतिक मूल्यों और सेवा भावना को सुदृढ़ करते हैं। अंत में प्रदेशाध्यक्ष कर्नल योगेन्द्र सिंह एवं बीना जोशी ने सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।  कार्यक्रम का  संचालन प्रकाश जोशी द्वारा किया गया।

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