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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा: दर्शन, आरती और हरेला पर पौधरोपण से दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

By: Naveen Joshi

On: Thursday, July 16, 2026 10:48 PM

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सोमनाथ (गुजरात)। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा के अंतर्गत उत्तराखंड से पहुंचे तीर्थ यात्रियों ने  धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव एवं भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अनेक पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा हरेला पर्व के अवसर पर पौधरोपण कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प भी लिया।

दिन की शुरुआत तीर्थयात्रियों द्वारा पवित्र बाणगंगा के दर्शन से हुई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थल अत्यंत पवित्र माना जाता है और यहां दर्शन-पूजन करने से श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। बाणगंगा में श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव के साथ पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा विश्व कल्याण की कामना की।

इसके उपरांत यात्रा दल भालका तीर्थ पहुंचा, जहां भगवान श्रीकृष्ण के अंतिम अवतार की लीला से जुड़ी ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्मृतियां आज भी श्रद्धालुओं को भावविभोर करती हैं। मान्यता है कि इसी स्थान पर शिकारी जरा के तीर (भाल) से भगवान श्रीकृष्ण को आघात लगा था, जिसके कारण इस स्थल का नाम भालका तीर्थ पड़ा। यहां सभी श्रद्धालुओं ने विधिवत दर्शन, पूजन एवं आरती में भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया और सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं को नमन किया।

शाम के समय तीर्थ यात्रियों ने सोमनाथ संग्रहालय का भ्रमण किया। संग्रहालय में सोमनाथ मंदिर के विभिन्न कालखंडों से जुड़े प्राचीन अवशेष, शिल्प, मूर्तियां तथा मंदिर पर हुए ऐतिहासिक आक्रमणों और उसके पुनर्निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण धरोहरों को संरक्षित किया गया है। संग्रहालय के भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं ने सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास, उसके संघर्ष और पुनर्निर्माण की प्रेरणादायक गाथा को जाना।

इसके बाद सभी श्रद्धालु त्रिवेणी संगम घाट पहुंचे, जहां हिरण, कपिला एवं अदृश्य सरस्वती नदियों का पावन संगम होता है। यहां आयोजित भव्य संध्या आरती में शामिल होकर श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठे। मंत्रोच्चार, दीपों की दिव्य आभा और भजन-कीर्तन के बीच संगम तट का वातावरण अत्यंत भक्तिमय और मनमोहक बना रहा।

हरेला पर्व के पावन अवसर पर उत्तराखंड के तीर्थ यात्रियों ने धार्मिक यात्रा को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से भी जोड़ा। त्रिवेणी संगम घाट के समीप स्थित शारदा पीठ में श्रद्धालुओं ने बोरसली (मौलसिरी/बकुल) के दो पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर सभी ने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने, प्रकृति के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित वातावरण तैयार करने का सामूहिक संकल्प लिया।

यात्रा के दौरान हरेला पर्व की पूर्व संध्या पर सोमनाथ मंदिर परिसर में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा भेंट किए गए रुद्राक्ष के पौधे का भी विधिवत रोपण किया गया। श्रद्धालुओं ने इसे उत्तराखंड और गुजरात के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक बताते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल बताया।

यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा केवल धार्मिक दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपराओं, राष्ट्रीय एकता और प्रकृति संरक्षण के प्रति जनजागरण का भी एक सशक्त माध्यम बन रही है। श्रद्धालुओं ने हरेला पर्व के संदेश को देशभर में जन-जन तक पहुंचाने और प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान किया।

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