देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हुई उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के विकास, जनकल्याण और सुशासन को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण एवं दूरगामी निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, श्रमिकों के अधिकारों को और मजबूत करने, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, न्यायिक एवं खेल आधारभूत संरचना के विस्तार, पर्यटन को प्रोत्साहन तथा औद्योगिक विकास को गति देने से जुड़े प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगाई।
कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी महानिदेशक सूचना एवं अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश में पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी शासन व्यवस्था को और मजबूत करना है, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके।
सबसे महत्वपूर्ण निर्णय राज्य सेक्टर की गौ पालन योजना में किया गया। अब तक सीमित दायरे में संचालित इस योजना का लाभ सामान्य वर्ग के पशुपालकों को भी मिलेगा। सरकार ने गाय के साथ-साथ भैंस खरीदने का विकल्प भी उपलब्ध कराया है तथा पशु की यूनिट लागत 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के पशुपालकों को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। सरकार का अनुमान है कि पहले वर्ष में 2128 से अधिक पशुपालक इस योजना से लाभान्वित होंगे। इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ने, ग्रामीण आय में वृद्धि होने तथा पलायन की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
श्रमिकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए कैबिनेट ने उत्तराखण्ड मजदूरी संहिता नियमावली-2026 को मंजूरी प्रदान की। नई व्यवस्था के तहत न्यूनतम मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित होगा, ओवरटाइम का दोगुना पारिश्रमिक मिलेगा तथा प्रत्येक माह की सात तारीख तक वेतन देना अनिवार्य होगा। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ-साथ समान कार्य के लिए महिला एवं पुरुष को समान वेतन का प्रावधान भी किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे लाखों श्रमिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिलेगा।
औद्योगिक क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी और श्रमिक हितैषी बनाने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड औद्योगिक संबंध नियमावली-2026 को भी मंजूरी दी गई। इसमें औद्योगिक विवादों के त्वरित समाधान, ट्रेड यूनियनों की मान्यता, शिकायत निवारण समितियों के गठन, हड़ताल एवं तालाबंदी की स्पष्ट प्रक्रिया तथा श्रमिकों के कौशल विकास के लिए री-स्किलिंग फंड का प्रावधान किया गया है।
शिक्षा और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्रावासों के संचालन के लिए नई नियमावली लागू करने का निर्णय लिया। इससे मेधावी विद्यार्थियों को बेहतर आवास, भोजन, अध्ययन और व्यक्तित्व विकास का अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।
युवाओं और खेल प्रतिभाओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हल्द्वानी स्थित उत्तराखण्ड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के संचालन हेतु 122 नियमित पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। आवश्यक तकनीकी एवं सहायक सेवाओं के लिए आउटसोर्स व्यवस्था की भी स्वीकृति दी गई है, जिससे विश्वविद्यालय का संचालन प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
न्यायिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में कैबिनेट ने हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में हाईकोर्ट परिसर निर्माण के लिए लगभग 40 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक न्यायिक परिसर विकसित किया जा सकेगा।
पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को साथ लेकर चलने की नीति के तहत ईको टूरिज्म के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की संरचना में संशोधन किया गया है। समिति में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी, जिससे जैव विविधता संरक्षण, जड़ी-बूटी प्रबंधन, कूड़ा नियंत्रण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को और सशक्त बनाया जा सके।
आधारभूत विकास के क्षेत्र में कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से हरिद्वार तक विस्तारित करने के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के बीच समझौता ज्ञापन किए जाने को मंजूरी प्रदान की। माना जा रहा है कि इस परियोजना से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी, औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार होगा और हजारों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
कैबिनेट ने केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों के अनुरूप उत्तराखण्ड माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम में संशोधन अध्यादेश लाने को भी मंजूरी दी। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन की ग्रामीण पेयजल योजनाओं के हस्तांतरण के लिए भारत सरकार के प्रोटोकॉल को लागू करने, उत्तराखण्ड वन विकास निगम में स्केलर भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने, सहकारी समिति नियमावली से भेदभावपूर्ण प्रावधान हटाने तथा बंगाली मूल के अनुसूचित जाति समुदाय के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने संबंधी प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई।
राज्य सरकार का कहना है कि कैबिनेट के इन निर्णयों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी, किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ेगी, श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित होंगे, विद्यार्थियों और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलेंगे तथा न्यायिक, औद्योगिक और आधारभूत ढांचे का तेजी से विस्तार होगा। सरकार ने विश्वास जताया कि ये फैसले उत्तराखंड को आत्मनिर्भर, समृद्ध और रोजगारपरक राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।









